- शिशु के अंतःकरण में (प्रारंभिक जीवन से ही) मानवीय आदर्शों के प्रति निष्ठा भाव जगाना चाहिए : प्रमोद कुमार
- शिशु का नामकरण संस्कारोत्सव गायत्री यज्ञीय विधान से संपन्न हुआ
टीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार गुदड़ी बाजार के मणिलाल साहु परिवार के बेटे बहु विशाल साहु एवं जस्सी राज की नवजात शिशु का अन्नप्राशन संस्कारोत्सव बहुत ही आनन्दमय उल्लासमय मंगलमय गायत्री यज्ञीय अनुष्ठान विधान के दिव्य वातावरण में विस्तार से एवीन प्लाजा में मनाया गया।
इस कार्यक्रम आयोजन में गायत्री महामंत्र का सस्वर पाठ व गुरुईश वंदना, पूजा साधन सामग्री शुद्धिकरण, षटकर्म, संकल्प, कलश पूजन, दीप पूजन, देवावाहन, नमन-वंदन व षोडशोपचार पूजन व स्वस्ति वाचन पाठ रक्षा विधान सहित नामकरण का संस्कारोत्सव विधान कराया गया।
नामकरण संस्कार प्रकरण में माता पिता और शिशु के साथ साथ इस शुभ कार्यक्रम में शामिल सभी आगन्तुक परिजनों को भी वैदिक मंत्राभिषेक विधान किए गए। यज्ञीय पुरोहित प्रमोद कुमार ने बताया कि शिशु के अंतःकरण में प्रारंभिक जीवन से ही मानवीय आदर्शों के प्रति निष्ठा भाव जगाना चाहिए।कहा कि जीवात्मा शिशु रूप में ईश्वर प्रदत्त एक मानवीय उपहार स्वरूप है, उसे जीवन का कर्तव्य व उत्तरदायित्व निर्वाह का बोध भी भविष्य में होना चाहिए।
माता पिता अभिभावक शिशु के जीवन में दोष दुर्गुण से बचाये रखने और उसके स्वभाव में सुसंस्कार, सद्गुण ग्रहण आदि समय समय पर बताते समझाते रहना चाहिए। इस विधान में पवित्रता से शुभ पात्र में लिखित, संस्कारित, संयोजित ढके हुए नामपट को हटाकर नाम वरेण्य की घोषणा की गयी और भाव किया गया कि घोषित नाम व्यक्तित्व का प्रतीक बन कर सबका गौरव बढ़ाने वाला हो।
आगे मंत्र पाठ कर सबने दोहराया कि शुद्धोऽसि, बुद्धोऽसि, शिशु चिरजीवी हो, कर्तव्यनिष्ठ हो, धर्मशील हो, ओजस्वी तेजस्वी हो, प्रगतिशील हो, 21 वी सदी उज्जवल भविष्य हो, सबके उद्घोषणा बाद शेष यज्ञीय विधान कर्मकाण्ड सहित विशेष मंत्र आहुति प्रदान किए गए।
अंत में यज्ञीय आचार्य, अभिभावक, साधक, आगन्तुक गणों ने शिशु के ऊपर अक्षत, गंगाजल व पुष्प की वर्षा से स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्जवल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ कर आशीर्वाद दिए। फिर प्रसाद वितरण कर समापन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के मणिलाल साहु और जय नारायण प्रसाद ने दी।