सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय आंकड़ों से सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार : संजय सर्राफ
टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 29 जून को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के महान सांख्यिकीविद् एवं वैज्ञानिक प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिवस की शुरूआत वर्ष 2007 में भारत सरकार द्वारा की गई थी।
इसका उद्देश्य सांख्यिकी के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा नीति-निर्माण, विकास योजनाओं और सुशासन में विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका को रेखांकित करना है। सांख्यिकी किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला मानी जाती है। किसी देश की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग तथा रोजगार संबंधी योजनाओं का निर्माण विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर ही किया जाता है।
सटीक और प्रमाणिक आंकड़े सरकार को योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने, संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित करने तथा विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता प्रदान करते हैं। प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस ने भारत में आधुनिक सांख्यिकी को नयी दिशा प्रदान की।
उन्होंने महालनोबिस दूरी जैसी महत्वपूर्ण सांख्यिकीय अवधारणा विकसित की तथा बड़े पैमाने पर नमूना सर्वेक्षण की वैज्ञानिक पद्धति को लोकप्रिय बनाया। उनके योगदान के कारण भारत में योजनाबद्ध विकास और आंकड़ा-आधारित नीति निर्माण को नई मजबूती मिली।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों को सांख्यिकी के महत्व से परिचित कराना, आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण को प्रोत्साहित करना तथा साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
मौके पर देशभर में संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानों, प्रतियोगिताओं और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें सांख्यिकी के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करते हैं। इस दिवस की विशेषता यह है कि यह केवल आंकड़ों के संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सही विश्लेषण, पारदर्शी उपयोग और विश्वसनीय प्रस्तुतीकरण के महत्व पर भी बल देता है।
आज के डिजिटल युग में डेटा को नई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (अक), मशीन लर्निंग, डिजिटल शासन, स्वास्थ्य अनुसंधान, जलवायु परिवर्तन, जनगणना तथा आर्थिक नियोजन जैसे क्षेत्रों में सांख्यिकी की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस हमें यह संदेश देता है कि सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय आंकड़े किसी भी राष्ट्र की प्रगति, सुशासन और समावेशी विकास के लिए अनिवार्य हैं। वैज्ञानिक सोच, प्रमाण-आधारित निर्णय और उत्तरदायी प्रशासन के माध्यम से ही भारत एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ सकता है।