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महेश नवमी 23 जून को

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महेश नवमी 23 जून को
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महेश नवमी 23 जून को

  • यह केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं,बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा, संस्कार और एकता का है प्रतीक : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महेश नवमी महेश्वरी समाज का प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व है, जो प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष महेश नवमी 23 जून को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान महेश अर्थात भगवान शिव तथा माता पार्वती की आराधना को समर्पित है।

मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव की कृपा से महेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए यह दिवस समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में क्षत्रिय वंश के 72 उमरावों ने हिंसा और युद्ध का मार्ग त्यागकर भगवान शिव की आराधना की थी। 

भगवान महेश ने उन्हें अहिंसा, धर्म, व्यापार एवं लोककल्याण का मार्ग अपनाने का आशीर्वाद दिया। तभी से उनके वंशज महेश्वरी कहलाएं और महेश नवमी उनके स्थापना दिवस के रूप में मनाई जाने लगी। महेश नवमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा, संस्कार और एकता का प्रतीक भी है। 

इस अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष पूजन-अर्चन, अभिषेक, भजन-कीर्तन, शोभायात्रा तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। अनेक स्थानों पर रक्तदान शिविर, चिकित्सा शिविर, वृक्षारोपण, जरूरतमंदों के बीच भोजन एवं वस्त्र वितरण तथा विभिन्न सेवा कार्य भी संपन्न किए जाते हैं।

इस पर्व का मुख्य उद्देश्य समाज में प्रेम, भाईचारा, नैतिक मूल्यों, सेवा भावना और मानव कल्याण की भावना को प्रोत्साहित करना है। महेश नवमी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश देती है। यह पर्व भगवान शिव के बताए सत्य, संयम, करुणा और लोकमंगल के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा प्रदान करता है। 

वर्तमान समय में महेश नवमी का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि यह समाज को एकजुट करने, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने तथा सेवा और सद्भाव के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि महेश नवमी महेश्वरी समाज के साथ-साथ समस्त समाज के लिए श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी पर्व माना जाता है।

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