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आस्था, पवित्रता और मोक्ष का महापर्व गंगा दशहरा 25 को

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आस्था, पवित्रता और मोक्ष का महापर्व गंगा दशहरा 25 को
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भक्ति, सेवा, दान, सदाचार और प्रकृति के प्रति सम्मान की देता है प्रेरणा : संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में गंगा दशहरा का पर्व अत्यंत पावन, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई, सोमवार को मनाया जाएगा। 

मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु गंगा स्नान, दान-पुण्य, जप-तप एवं पूजा-अर्चना कर अपने पापों से मुक्ति और जीवन मेंसुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हुईं, किंतु उनके वेग को संभालना असंभव था। 

तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर उनके वेग को नियंत्रित किया और पृथ्वी पर अवतरित किया। इसी दिव्य अवतरण की स्मृति में गंगा दशहरा मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि मानव जीवन में पवित्रता, सेवा, संयम और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी देता है। दशहरा शब्द का अर्थ है दस प्रकार के पापों का नाश। 

धार्मिक मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने एवं श्रद्धा भाव से पूजा करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं। इस दिन ओम नम: शिवाय तथा गंगे हरि मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान कर दीपदान करते हैं तथा गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल एवं जलदान करते हैं। गंगा दशहरा का आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा है। 

मां गंगा को केवल नदी नहीं बल्कि मोक्षदायिनी देवी माना गया है। भारतीय संस्कृति में गंगा जीवन, शुद्धता और आस्था की प्रतीक हैं। गंगा जल को पवित्र एवं अमृत समान माना जाता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक हिंदू संस्कारों में गंगाजल का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था गंगा से जुड़ी हुई है। यह पर्व हमें जल संरक्षण और नदियों की स्वच्छता का संदेश भी देता है। 

आज बढ़ते प्रदूषण के कारण नदियों का अस्तित्व संकट में है। ऐसे में गंगा दशहरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर पर्यावरण संरक्षण का भी प्रेरणादायक अवसर बन गया है। हमें मां गंगा सहित सभी नदियों को स्वच्छ और निर्मल बनाये रखने का संकल्प लेना चाहिए। 

गंगा दशहरा भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और अध्यात्म का अनुपम संगम है। यह पर्व हमें भक्ति, सेवा, दान, सदाचार और प्रकृति के प्रति सम्मान की प्रेरणा देता है। मां गंगा की कृपा से मानव जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। इसलिए यह पर्व भारतीय जनमानस में विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

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