टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मानव तस्करों के कुकृत्यों का उजागर स्वाभाविक सा बनता चला जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि रांची के ही 51 वर्षीय मानव तस्कर फ्रांसिस किस्पोटा को बिहार के मोतिहारी में रेलवे सुरक्षा बल के द्वारा 21 बच्चों के साथ गिरफ्तार किया गया है। यह विषय अत्यंत ही निंदनीय है।
डॉ साहु ने कहा- झारखंड धर्म स्वतंत्रय अधिनियम 2017 जैसे कानून होने के बाद भी झारखंड के ही गोड्डा एवं साहिबगंज सहित बिहार के भागलपुर से 5 से 12 वर्ष तक के बच्चों की तस्करी के ख्याल से शिक्षा के नाम पर मोतिहारी के चांदमारी मोहल्ले में रखा जाता है।
इसकी भनक तक राज्य सरकार को नहीं लगती है, जो चिंतनीय विषय है। 21 बच्चों में ज्यादातर जनजातीय परिवार के बच्चे हैं, जो दर्शाती है कि आज भी ईसाई मिशनरियों के द्वारा जनजातीय परिवार हीं धर्मांतरण व मानव तस्करी के लिए सबसे बड़ा लक्षित समाज है।
तस्करों द्वारा बच्चों को या तो उनके अंगों का व्यापार किया जाता है अथवा भीख मांगने अथवा नौकर-चाकर बनाकर रखने का कार्य कराया जाता है। बच्चों को अपने संरक्षण में रखकर उन्हें धर्मांतरित भी कर दिया जाता है, ऐसे में झारखंड का यह कानून किस काम का है? इस बात को सरकार व प्रशासन को सोचना चाहिए।
डॉ साहु ने कहा कि झारखंड सरकार मानव तस्कर फ्रांसिस किसपोटा पर कानूनी कार्रवाई कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दे तथा झारखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2017 को कड़ाई से पालन करें। उक्त जानकारी विहिप झारखंड प्रांत के प्रचार-प्रसार सह प्रांत प्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने दी।