घर घर अलख जगायेंगे हम, शांतिकुञ्ज का संदेश जन-जन को पहुचायेंगे
प्रज्ञागीत से 5 कुंडीय यज्ञ सोलल संपन्न
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार युगतीर्थ शांतिकुञ्ज तत्वावधान में गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू के मार्गदर्शन में कांके प्रखंड समन्वय समिति के सान्निध्य में एक दिवसीय व 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ गुरु-ईश ध्यान वंदना, मंगलाचरण, पवित्रीकरण, न्यासकरण षटकर्म और मंगल कलश पूजन- अर्चन, स्वस्तिवाचन, रक्षा विधान पाठ कर यज्ञीय अनुष्ठान एवं संध्या कालीन दीपयज्ञ से समापन हुआ।
यह एक दिवसीय एवं 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ कार्यक्रम था। यह कार्यक्रम शांतिकुञ्ज मुख्यालय के निर्देशानुसार कई संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। इस बाबत प्रखंड समन्वियका रेणु श्रीवास्तव बहिन तथा जिला महिला युवा समन्वयियका सुलोचना शाहदेव बहिन की सदस्य टीम के सान्निध्य व सहयोग में संपन्न हुआ।
दोनों ने विगत जनवरी 2026, बैरागी द्वीप वसंतोत्सव समारोह सम्मेलन में अपनी टीम की भागीदारी तथा उसमें लिये गये संकल्प तथा गत माह 22 अप्रैल शक्तिपीठ सेक्टर टू की विशेष संकल्प गोष्ठी की जानकारी यज्ञीय विधान के दौरान सबको बताया। गायत्री उपासना साधना का अर्थ, भावार्थ, व्याख्यान एवं चमत्कार अवर्णनीय है। हम आसानी से वर्णन नहीं कर सकते।
परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ ने इस पर बहुत विशाल व विस्तार से हजारों पुस्तकें लिख डाली हैं। उनका कहना है कि मंत्रों का सूक्ष्म प्रभाव बहुत ही महत्वपूर्ण है। उसमें भी गायत्री महामंत्र की महिमा, महत्ता तो और अधिक विलक्षण है। यह परमात्मा की मूल शक्ति और बहुत ही महत्वपूर्ण, मूल्यवान है। इस महाशक्ति का लाभ असंदिग्ध है, जिन्हें वह सुलभ हुआ, लाभ हुआ वो निहाल हुआ, धन्य हो गये।
परम पूज्य गुरुदेव और वं माता जी ने अपने युग के अपने दादा गुरुदेव जी के निदेर्शानुसार अपना तपोबल व संकल्प बल से इस वैदिक महामंत्र को सर्व सुलभ और स्वस्थ-सुखद बनाया। जन-जन के तन-मन को लाभान्वित करने तथा जन-जन के जीवन के लिए घर-घर अलख जगाने के लिए सर्व सुलभ व सरल बना दिया। यह सर्वदा, सर्वथा सर्व हितकारी उपासना सबके लिए स्वस्थ-सुखद है। इससे अनेक कठिनाइयां हल होती हैं।
नवरात्र अनुष्ठान काल में इसकी सामूहिक जप-अनुष्ठान पुरश्चक्रण की महत्ता और बढ़ जाती है। गायत्री महामंत्र संजीवनी विद्या एवं सरल यज्ञीय विधान महत्ता, आवश्यकता तथा इसकी अपेक्षित उपयोगिता पर प्रकाश डाल बताया कि यह 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ जन्म शताब्दी अनुयाज क्रम की एक कड़ी है। यज्ञीय विधान 3 पाली में हुआ। एक दर्जन दीक्षा संस्कार भी हुए।
यह कार्यक्रम अब तेजी से कांके प्रखंड के अनेकानेक पंचायत व ग्रामीण क्षेत्रों में भी जन-जन के लिए रोचक स्तर पर अनुभव कराना है और नयी पीढ़ी के बच्चों को यज्ञीय विधान से सुसंस्कारवान बनाना है। सुबह दोपहर यज्ञीय अनुष्ठान विधान से आहुतियां प्रदान की गई और सायंकालीन दीपयज्ञ में जन्म दिवस संस्कारोत्सव भी सोल्लास मनाये गये। सबकी मंगलमय कामना व शांति-पाठ कर कार्यक्रम संपन्न किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के रेणु श्रीवास्तव, सुलोचना शाहदेव और जय नारायण प्रसाद ने दी।