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गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती साहित्य,संस्कृति और मानवता का अमर उत्सव : संजय सर्राफ

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गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती साहित्य,संस्कृति और मानवता का अमर उत्सव : संजय सर्राफ
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  • गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती साहित्य, संस्कृति और मानवता का अमर उत्सव : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क । हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान साहित्यकार, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती हर वर्ष बड़े सम्मान और उत्साह के साथ 7 मई को मनाई जाती है। जबकि बंगाली पंचांग के अनुसार यह 25 बैशाख के दिन आती है। वर्ष 1861 में कोलकाता में जन्मे टैगोर ने भारतीय साहित्य और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई।

टैगोर जयंती उनके साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान को याद करने के लिए मनाई जाती है। उन्होंने कविता, उपन्यास, नाटक, संगीत और चित्रकला के माध्यम से मानवता, प्रकृति और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संदेश दिया। उनकी प्रसिद्ध कृति गीतांजलि के लिए उन्हें 1913 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ, जिससे वे एशिया के पहले नोबेल विजेता बने। 

उनके द्वारा रचित भारत का राष्ट्रगान जन गण मन आज भी हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति का संचार करता है। रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती भारतीय साहित्य और कला के गौरव को पुनर्जीवित करने का अवसर है। यह दिन हमें उनकी विचारधारा स्वतंत्रता, शिक्षा, समानता और मानवता को समझने और अपनाने की प्रेरणा देता है।

 टैगोर ने शिक्षा को केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास का माध्यम माना। इसी उद्देश्य से उन्होंने विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज भी उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र है।इस जयंती का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को टैगोर के आदर्शों से परिचित कराना है। 

उनके लेखन में प्रकृति के प्रति प्रेम, समाज सुधार और मानवता की गहरी भावना झलकती है। वे मानते थे कि शिक्षा और संस्कृति के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें एक बेहतर समाज बनाने की दिशा में प्रेरित करते हैं।

रविंद्र टैगोर जयंती के अवसर पर देशभर, विशेषकर पश्चिम बंगाल और शांतिनिकेतन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और साहित्यिक संस्थानों में उनकी कविताओं, गीतों और नाटकों का मंचन होता है। रवीन्द्र संगीत की मधुर प्रस्तुतियां वातावरण को भावविभोर कर देती हैं। इस दिन लोग उनकी रचनाओं का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती केवल एक जन्मदिन नहीं,बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और मानवता के मूल्यों का उत्सव है। यह दिन हमें उनकी शिक्षाओं को अपनाकर समाज में प्रेम, शांति और समरसता फैलाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। गुरुदेव टैगोर की विरासत सदैव हमारे मार्गदर्शन का प्रकाश बनी रहेगी।

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