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बुद्ध पूर्णिमा...

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बुद्ध पूर्णिमा...

भारी दबाव वाली जीवनशैली

त्रिवेणी दास

एबीएन एडिटोरियल डेस्क । वर्तमान युग का दौर अत्यंत तेज गति वाली है, जिसकी अनुभूति तथा अनुसरण प्राय: हर कोई करता दिखाई दे रहा है। एक तो आवागमन का तेज संसाधन, दूसरा सूचना की तेज गति वाले उपकरण और भावनाओं संवेदनाओं तथा मन मस्तिष्क को तेजी से अपने नियंत्रण में लेने वाले वर्चुअल/आभासी एवं प्रत्यक्ष परिदृश्य के दबाव में मानव समाज दबा हुआ है। कोई भी कब और कैसे तनाव एवं अवसाद से ग्रसित हो जा रहा है उसे पता ही नहीं चल पता है। 

खान-पान, रहन-सहन और व्यवहार  प्रकृति के सानिध्य से लगभग परे हो कर प्रदूषित हो गए हैं। शारीरिक मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के मध्य संतुलन का बिखराव रोग तथा शोक का कारण बना हुआ है।

अनियंत्रित जीवनशैली से वास्तविक सफलता कहीं देखने को नहीं मिल रही है। ऊंचे पद पर बैठे हुए किसी व्यक्ति को देखकर उसकी सफलता का अनुमान लगाया जाता है परंतु वह सफल व्यक्ति भी भारी दबाव वाली जीवनशैली के कारण सफलता का आनंद नहीं ले पाता है।

जीवन में सक्रियता, परिश्रम आवश्यक है तो उससे कहीं अधिक अनुशासन, एकाग्रता और मर्यादा की सीमा का अनुपालन आवश्यक है। भारतीय जीवनशैली में व्यक्तित्व के परिशोधन के नियम निर्धारित हैं जिनके द्वारा ही आधुनिक तेज गति वाली जीवन शैली के दबाव से मुक्त हुआ जा सकता है।

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