Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
समाज

मई दिवस श्रमिकों के संघर्ष, अधिकार और सम्मान का है प्रतीक : संजय सर्राफ

मई दिवस श्रमिकों के संघर्ष, अधिकार और सम्मान का है प्रतीक : संजय सर्राफ
विज्ञापन
  • मई दिवस श्रमिकों के संघर्ष, अधिकार और सम्मान का है प्रतीक : संजय सर्राफ

 टीम एबीएन, रांची । झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस जिसे मई दिवस भी कहा जाता है जो प्रतिवर्ष 1 मई को पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह दिवस श्रमिकों,मजदूरों और कामगारों के सम्मान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा समाज निर्माण में उनके योगदान को स्मरण करने के लिए समर्पित है। श्रमिक वर्ग किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होता है, इसलिए यह दिन उनके परिश्रम, संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। 

अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर से हुई थी। उस समय मजदूरों से 12 से 16 घंटे तक कठोर कार्य कराया जाता था। श्रमिकों ने प्रतिदिन 8 घंटे कार्य, उचित वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर आंदोलन किया। इस आंदोलन के दौरान कई मजदूरों ने अपने प्राणों की आहुति दी।

 उनके संघर्ष और बलिदान की स्मृति में वर्ष 1889 में पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। तभी से यह दिवस विश्वभर में मनाया जाने लगा।भारत में भी श्रम दिवस का विशेष महत्व है। भारत में पहली बार वर्ष 1923 में चेन्नई में मई दिवस मनाया गया था। इसके बाद से यह दिवस देशभर में विभिन्न श्रमिक संगठनों, उद्योगों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा मनाया जाता है। 

कई राज्यों में 1 मई को सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया जाता है। इस दिवस की सबसे बड़ी महत्ता यह है कि यह समाज को श्रमिकों के अधिकारों के प्रति जागरूक करता है। मजदूर वर्ग खेतों, कारखानों, निर्माण स्थलों, परिवहन, सफाई, खदानों और अनेक क्षेत्रों में कठिन परिश्रम करके राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देता है। 

श्रम दिवस हमें याद दिलाता है कि श्रमिकों के बिना विकास की कल्पना अधूरी है।मई दिवस की विशेषता यह है कि इस दिन श्रमिक एकता, समानता और न्याय का संदेश दिया जाता है। विभिन्न स्थानों पर रैलियां, सभाएं, सम्मान समारोह, संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

श्रमिक संगठनों द्वारा बेहतर मजदूरी, सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक व्यवहार की मांग उठाई जाती है। इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, बाल श्रम और शोषण को समाप्त करना, सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना तथा श्रम के सम्मान की भावना विकसित करना है। 

साथ ही यह दिन समाज को यह संदेश देता है कि हर प्रकार का श्रम पूजनीय है और हर श्रमिक सम्मान का अधिकारी है।आज के आधुनिक युग में तकनीक के विकास के बावजूद श्रमिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है। चाहे किसान हो,मजदूर हो, चालक हो, सफाईकर्मी हो या फैक्ट्री कर्मचारी-हर श्रमिक समाज को गति देता है। 

इसलिए हमें श्रमिकों के प्रति सम्मान, संवेदना और सहयोग की भावना रखनी चाहिए, अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि श्रमिकों के संघर्ष, अधिकार और सम्मान का प्रतीक है। यह दिन हमें प्रेरणा देता है कि हम श्रम का सम्मान करें और एक न्यायपूर्ण, समानतापूर्ण तथा समृद्ध समाज के निर्माण में योगदान दें।

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 6,980