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25 अप्रैल को धूमधाम से मनायी जायेगी सीता नवमी

25 अप्रैल को धूमधाम से मनायी जायेगी सीता नवमी
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  • सीता नवमी 25 अप्रैल को 
  • सीता नवमी त्याग, पवित्रता धर्म, धैर्य और आदर्श नारीत्व का पावन उत्सव : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सीता नवमी जिसे जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह पर्व माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष सीता नवमी 25 अप्रैल दिन शनिवार को मनायी जायेगी। 

यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को पड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मिथिला बिहार के जनकपुर क्षेत्र में राजा जनक के खेत से माता सीता का प्राकट्य हुआ था। माता सीता को त्याग, पतिव्रता धर्म, सहनशीलता और आदर्श नारीत्व की प्रतिमूर्ति माना जाता है। उनका जीवन हर युग की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 

सीता नवमी के दिन श्रद्धालु विशेष रूप से माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं तथा व्रत रखकर सुख-समृद्धि और पारिवारिक कल्याण की कामना करते हैं।सीता नवमी का मुख्य उद्देश्य समाज में नारी के सम्मान, शक्ति और सहनशीलता के गुणों को जागृत करना है। माता सीता ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए भी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। 

उनका जीवन यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और मर्यादा बनाये रखना ही सच्चा धर्म है। यह पर्व हमें पारिवारिक मूल्यों, निष्ठा और त्याग की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। पौराणिक कथा के अनुसार, मिथिला के राजा जनक एक बार अपने राज्य में यज्ञ की तैयारी कर रहे थे। यज्ञ स्थल की भूमि को शुद्ध करने के लिए जब वे स्वयं हल चला रहे थे, तभी धरती से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई। 

राजा जनक ने उस कन्या को ईश्वर का आशीर्वाद मानकर अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और उनका नाम सीता रखा, क्योंकि वे हल की नोंक (सीत) से प्रकट हुई थीं। आगे चलकर माता सीता का विवाह भगवान श्रीराम से हुआ और उन्होंने अपने जीवन में आदर्श पत्नी और नारी धर्म का पालन करते हुए अनेक कठिन परीक्षाओं को सहन किया। इस दिन मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं व्रत रखती हैं और कथा श्रवण करती हैं। 

विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए माता सीता का पूजन करती हैं। कई स्थानों पर रामायण पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है। अंतत:, सीता नवमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह नारी शक्ति, त्याग और मर्यादा का जीवंत प्रतीक है, जो समाज को सदैव सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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