अशोक खेमका समाज के लिए गौरव एवं प्रेरणा स्रोत : संजय सर्राफ
एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने मारवाड़ी समाज के गौरव, प्रख्यात आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के ईमानदार, साहसी एवं सिद्धांतनिष्ठ कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया है।
उन्होंने कहा कि खेमका जैसे अधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था में सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता की जीवंत मिसाल हैं। हरियाणा कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने हाल ही में 34 वर्षों की लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ग्रहण की। अपने कार्यकाल के अंतिम क्षणों में उन्होंने एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपने परिवार, सहकर्मियों एवं शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
साथ ही उन्होंने विनम्रता का परिचय देते हुए कहा कि यदि उनके किसी निर्णय से किसी को भी कष्ट पहुंचा हो, तो वे उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। यह उनकी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। वर्ष 1991 बैच के इस जांबाज अधिकारी का प्रशासनिक जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा।
34 वर्षों के कार्यकाल में उनका कुल 57 बार तबादला हुआ, जो औसतन हर सात माह में एक स्थानांतरण को दर्शाता है। इतना ही नहीं, कई बार उनका कार्यकाल एक माह से भी कम रहा। इसके बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और निर्भीकता के साथ किया।
अशोक खेमका वर्ष 2012 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आये, जब उन्होंने गुरुग्राम की एक बहुचर्चित भूमि सौदे से जुड़े मामले में तत्कालीन प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर निर्णय लेते हुए म्यूटेशन को रद्द कर दिया। इस फैसले ने उन्हें ईमानदार और निडर अधिकारी के रूप में स्थापित किया।
कोलकाता के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे खेमका ने आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनके पास पीएचडी और एमबीए जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं भी हैं। वे चाहते तो आरामदायक जीवन चुन सकते थे, किंतु उन्होंने सदैव सत्य और नैतिकता के मार्ग को प्राथमिकता दी।
संजय सर्राफ ने कहा कि अशोक खेमका का निष्कलंक एवं साहसी प्रशासनिक सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनका जीवन संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से समझौता नहीं करना चाहिए।