चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय संस्कृति के नवोदय का प्रतीक : डॉ अंकन
संस्कार भारती का भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर साहित्यिक कार्यक्रम संपन्न
टीम एबीएन, रांची। भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के अवसर पर संस्कार भारती, रांची महानगर ने एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसका शुभारंभ सुजाता मजूमदार एवं उनकी टीम ने ध्येय गीत एवं सरस्वती वंदना से की। दीप प्रज्ज्वलन झारखंड प्रांत अध्यक्ष डॉ. सुशील अंकन ने किया।
डॉ. अंकन ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय संस्कृति के नवोदय का प्रतीक है और ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त करते हैं। संगीत प्रस्तुति में सुजाता मजूमदार, जेपी सिंह, इंदु पराशर, बबीता शर्मा, मृदुला पाठक एवं विजय खोवाला ने मधुर गायन प्रस्तुत किया्। तबले पर अनूप कुमार ने अपना सहयोग दिया। भरतनाट्यम नृत्यांगना गार्गी शोम ने देवी के विभिन्न स्वरूपों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
काव्य गोष्ठी में कवियों ने नववर्ष की अपनी मंगल भावनाएं व्यक्त की
- आशुतोष प्रसाद— नव अरुणिम आभा लेकर, फिर वर्ष नया मुस्काया है...
- जवाहरलाल— चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा का हुआ आगमन...
- रेणु झा रेणुका— जगमग ज्योत देख, आये तेरे द्वार है दुर्गा महारानी...
- ऋतुराज वर्षा- जप लो श्रीराम का नाम
- सुनीता अग्रवाल— हे मर्यादा पुरुषोत्तम राम...
- रंजना वर्मा उन्मुक्त— मन-मन दीप जला दो आज...
- विभा वर्मा— शिवांगी बन भवानी मां...
- रेणु बाला धार— नव वर्ष अभिनंदन...
- निर्मला कर्ण— सजा है माता का दरबार...
- खुशबू बरनवाल सीपी— शुद्ध रखो मन वंदन को... आदि ने अपनी स्वरचित रचनाओं को प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में अध्यक्ष रामानुज पाठक ने कहा कि भारतीय नववर्ष हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। भूतपूर्व सदस्य जेपी श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का संचालन शशिकला पौराणिक ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन आशुतोष प्रसाद ने दिया।
इस अवसर पर डॉ. सुजाता मजूमदार, अनूप मजूमदार, बिंदिया कुमारी, अंश सिद्धार्थ, अभिनव सिद्धार्थ, नवेन्दु उन्मेष, कुमकुम गौड़, मिथिलेश पाठक एवं शिव कुमार पाठक सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।