ग्वालियर में दो जोड़ों का विवाह सम्पन्न
एबीएन न्यूज नेटवर्क (ग्वालियर)। दहेज प्रथा भारतीय समाज की एक पुरानी और गंभीर कुरीति है, जिसने न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाया है, बल्कि सामाजिक असमानता और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों को भी जन्म दिया है। इसी पृष्ठभूमि में संत रामपाल जी महाराज ने दहेजमुक्त विवाह को केवल एक सामाजिक पहल के रूप में ही नहीं देखा, बल्कि इसे अपने अनुयायियों के जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करके समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
इसी का उदाहरण बीते रविवार को ग्वालियर जिले की लश्कर तहसील स्थित उफ पैलेस मैरिज गार्डन में आयोजित एक दिवसीय जिला स्तरीय सत्संग के दौरान देखने को मिला, जहाँ दो जोड़ों का दहेजमुक्त रमैनी विवाह सम्पन्न हुआ। डीडी नगर निवासी अंकित भदौरिया का विवाह मुरार निवासी जया तोमर के साथ तथा भिंड निवासी रामप्रताप जी का विवाह घाटीगांव निवासी प्रियंका जी के साथ संपन्न कराया गया।
दोनों विवाह संत रामपाल जी महाराज के पावन सान्निध्य में मात्र 17 मिनट की गुरुवाणी असुर निकन्दन रमेनी के माध्यम से सम्पन्न हुए। विवाह में किसी भी प्रकार का बाहरी आडंबर नहीं था। न हल्दी-मेहंदी, न डीजे और न ही बारात जैसी खचीर्ली परंपराएं अपनायी गयी। पूरा आयोजन सरल, सादगीपूर्ण और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
विवाह में उपस्थित युवाओं ने इस रमैनी विवाह पद्धति को समाजहित में सही बताया। युवाओं का कहना था कि दहेज लेना और देना दोनों ही पारिवारिक तनाव और विवाद का कारण बनते हैं। केवल दहेज प्रथा को कुरीति कह देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक युवा को आगे आकर इसे अपनाना होगा।
युवाओं ने यह भी कहा कि जब युवा वर्ग संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाकर दहेज सहित समाज में फैली अन्य कुरीतियों के खिलाफ कदम बढ़ायेगा, तभी इन बुराइयों का अंत संभव है। यह दहेजमुक्त रमैनी विवाह समाज को सरल और निर्मल जीवन की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देता है।