- गायत्री शक्तिपीठ में परिजनों ने अपना जन्मदिवस संस्कार यज्ञीय विधान से मनाया
एबीएन सोशल डेस्क। जन्मदिन संस्कार यज्ञ के साथ ही मनाया जाना चाहिए।अंतःकरण को प्रभावित करने की यज्ञ की अपनी क्षमता विशेष है। इसे जन-जन का आन्दोलन बनाना चाहिए।
यज्ञीय पुरोहित भाई प्रमोद कुमार ने बताया। इस अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में आज रविवार को चन्द्र प्रकाश सक्सेना, श्रीमती शीला देवी, प्रदीप दिव्यायन एवं कुलदीप कुमार का जन्मदिवस यज्ञीय संस्कार विधान से मनाया गया।इस पावन अवसर पर सर्वदेव आवाह्न, पूजन-अर्चन के साथ पंचतत्वों का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।
पुरोहित ने बताया कि सृष्टि रचना के इन तत्व घटकों में निहित सूक्ष्म संस्कार के भाव-प्रभाव साधक के मनःक्षेत्र को प्राप्त होते हैं।इनमें प्रत्येक तत्व के गुण व पूजन-क्रम में प्रेरणाप्रद भावार्थ बताए गए। बताया कि इस क्रम में अपनी महत्वकांक्षा को सीमित रखने,लिए व्रतों को स्मरण करने, देव शक्तियों से उनकी वृति व शक्ति से मार्गदर्शन की प्रार्थना करनी चाहिए।
व्रत धारण उपरान्त यज्ञ-आहुति विधान से जन्मदिन संस्कार किया गया।उपस्थित बालक व परिजनों ने और अन्य साधक- शिष्य को एक बुराई छोड़ने व एक अच्छाई ग्रहण करने का संकल्प किया।संकल्प की रक्षा,सफलता के लिए यज्ञ कुण्ड पर साधकों ने देव शक्तियों को नमन-वंदन कर अग्निहोत्र में महामंत्रों की मंगलमय आहुतियां दी।
पूर्णाहुति, आरती, क्षमा प्रार्थना उपरान्त सोल्लास विधान संपन्न कर जन्मदिन परिजनों को मंगलमय पूजित कलश जल से अभिसिंचन व आशीर्वचन मंत्र पाठ सहित पुष्प वर्षा कर आशीर्वाद , बधाई व मंगल वस्तिवाचन कर अनुष्ठान विधान संपन्न किए गए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ-साधक सह मीडिया प्रचारक जय नारायण प्रसाद ने दी।