संघबद्ध साधनात्मक उपचार की मानवीय हृदय-अंतराल में अभीष्ट प्रभाव की जरूरत है
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री प्रज्ञापीठ बस स्टैंड धुर्वा में मुख्य ट्रस्टी भाई मनोजकुमार राय के सान्निध्य में एक विशिष्ट गोष्ठी हुई। उन्होंने नव निर्मित ट्रस्ट संरचना तथा शांतिकुंज से उसकी प्राप्त स्वीकृति के बारे में और क्रियान्वयन व जिम्मेदारी निर्वाह पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में नगरी प्रखंड समन्वय समिति गठन व उसकी भी प्राप्त स्वीकृति पत्र व उसपर सौंपी उत्तरदायित्व पर चर्चा जिला समन्वयक ने की।
जिला समन्वयक ने गुरुवर श्रीपूज्यवर द्वय प्रज्ञावतारी महाचेतना के युग निर्माण योजना व विचार क्रांति अभियान के अंतर्गत नव निर्मित, निर्धारित निर्देश व नियमानुसार संशोधित पत्र के 11 बिन्दु पर विस्तार से तदनुसार क्रियान्वित करने उसकी महत्ता, उपयोगिता समझने और आवश्यकतानुसार रिपोर्ट विवरण तैयार करना और सामयिक अवसर पर प्रस्तुत करने को दिशा-निर्देश पर प्रकाश डाला।
जिला समन्वयक द्वारा कार्यक्रम की शुरुआत उपस्थित साधकों द्वारा प्रथम गायत्री महामंत्र की 24 बार श्रीगुरुवाणी साथ सामूहिक सस्वर पाठ, संजू सरस्वती बहिन द्वारा युग निर्माण सत्संकल्प पाठ, नवयुग का आध्यात्मिक संविधान तथा मुख्य ट्रस्टी मनोज कुमार राय ने गुरुवर श्रीपूज्यवर के अपने अंग अवयव से अपेक्षा व अनुरोध को पढ़कर समझाया।
बताया गया कि हर इकाई प्रमुख को अपनी क्षेत्रीय स्तर पर वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए भी दिशा-निर्देश पर चर्चा हुई। साधनात्मक अनुष्ठान विधान पर प्रसाद ने बताया कि वर्तमान समय महाध्वंश व नवसृजन की हिलोरें ले रहा है। सामूहिक साधना के वैज्ञानिक प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि आज संघबद्ध साधनात्मक उपचार-विधान की मानवीय हृदय-अंतराल में अभीष्ट प्रभाव की जरूरत है।
शांतिकुञ्ज मुख्यालय को सप्त सूत्रीय कार्यक्रम अभियान अंतर्गत गृहे गृहे यज्ञीय कार्यक्रम, आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, महिला एवं जन जागरण, जन संपर्क, पुंसवन संस्कार, युवा मंडल सम्मेलन, नशा उन्मूलन, महिला की रिपोर्ट आज उपजोन, मुख्य जोन को प्रस्तुत कर दी गयी।
साथ ही भाई दीपक दयाल प्रसाद के सानिध्य में नामकुम क्षेत्र में जरार गांव में जन सम्पर्क कर युग साहित्य, गायत्री चालीसा, अखंड ज्योति युग निर्माण योजना व स्टीकर वितरण किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।