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संत रामपाल जी महाराज के विशेष सत्संग में 150 ने ली दीक्षा

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संत रामपाल जी महाराज के विशेष सत्संग में 150 ने ली दीक्षा
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  • 19 साल बाद सतलोक आश्रम करोंथा में हुआ संत रामपाल जी महाराज का विशेष सत्संग, लगभग 150 लोगों ने ली नाम दीक्षा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हरियाणा के करोंथा स्थित सतलोक आश्रम में सत्संग का पुनः आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर को संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने सत्य की जीत और धैर्य का फल बताया है, जिसे इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में अंकित किए जाने वाला दिन कहा जा रहा है।

पूर्व में, संत रामपाल जी महाराज का जो भारी विरोध हुआ था, वह झूठी अफवाहों और गलतफहमी के कारण फैलाया गया था। भक्तों के अनुसार, विरोधियों ने सत्य को दबाने का प्रयास किया, लेकिन आज यह सत्य सूर्य की तरह प्रकाशित हुआ है, जिसने विरोध के अंधकार को दूर कर दिया है। 

संत रामपाल जी महाराज के बताए मार्ग पर चलने के लिए लाखों लोग जुड़ रहे हैं, जिससे उनके जीवन में अभूतपूर्व सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। उनके मुख्य सामाजिक सुधारों ने समाज में एक नई लहर पैदा की है, लाखों लोगों ने नशीले पदार्थों का सेवन छोड़ दिया है।

सादगीपूर्ण और दहेज-रहित विवाहों की परंपरा स्थापित की जा रही है। अब वही लोग उनके ज्ञान की महत्ता को समझने लगे हैं, जो पहले उनका विरोध करते थे। उनके सिद्धांतों से प्रेरित अनुयायी अत्यंत सभ्य और साधारण जीवनशैली अपना रहे हैं, जो यह सिद्ध करता है कि सच्चा आनंद असभ्यता या नशा-पार्टियों में नहीं, बल्कि सात्विक जीवन में है।

संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत जरूरतमंदों की निस्वार्थ भाव से मदद की है, जिसमें उनके कट्टर विरोधी भी शामिल थे। अनुयायियों ने बताया कि उन्होंने कभी यह भेद नहीं किया कि कौन उनका भक्त है और कौन नहीं। उनकी विचारधारा जो तो काटा बोए ताको बोतू फूल (अर्थात बुराई करने वाले के साथ भी भलाई करनी चाहिए) पर आधारित है।

यह व्यापक मुहिम रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान प्रदान करके गरीब-जरूरतमंदों की सहायता करती है, जो कि किसी भी सरकार या बड़े अमीर व्यक्ति के लिए भी चलाना एक कठिन कार्य हैसंत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित निस्वार्थ सेवा और व्यापक सामाजिक कार्यों को देखने के बाद, करोंथा गांव के निवासियों का भी हृदय परिवर्तन हुआ है।

वे अब आश्रम आकर न केवल अपनी पिछली गलतियों के लिए माफ़ी मांग रहे हैं बल्कि भंडारे में भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। मीडिया में फैली झूठी अफवाहों की सच्चाई जानने के बाद, गांव वाले भी अब उनके ज्ञान से जुड़ रहे हैं। 

इस व्यापक हृदय परिवर्तन को उनकी करुणा और ज्ञान का प्रत्यक्ष प्रमाण माना जा रहा है, और अनुयायी उन्हें सबके पिता और साक्षात् भगवान के रूप में सम्मान देते हैं। सतलोक आश्रम करोथा में सत्संग होने के बाद लगभग डेढ़ सौ श्रद्धालुओं ने संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ग्रहण की पत्रकार कमल सिंह लोधा।

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