टीम एबीएन, रांची। दिगंबर जैन संत आचार्य 108 सूरत्न सागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य परमपूज्य 108 श्री सुतिर्थ सागर जी महाराज के प्रवचन का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति उम्र से नहीं गुणों से महान बनता है। पारसनाथ से खंडगिरी उदयगिरी विहार के क्रम में परमपूज्य 108 श्री सुतीर्थ सागर जी महाराज अपर बाजार रांची में विराजमान हैं।
प्रात: 8.15 बजे मुनिश्री का प्रवचन प्रारंभ हुआ। आज के प्रवचन में परम पूज्य गुरुवर ने कहा कि व्यक्ति उम्र से और कद से बड़ा नहीं होता बड़ा होता है तो अपने गुणो से। यह गुण ही है जो उसे महान बनाते हैं। लेकिन जैसे ही व्यक्ति महान बनता है उसके अंदर अहंकार आ जाता है और वही अहंकार उसके पतन का कारण बनती है। व्यक्ति ऊंचाइयों को छू सकता है लेकिन ऊंचाई पर बने रहना बहुत कठिन है।
ऊंचाई पर बने रहने के लिए व्यक्ति को नम्र होना बहुत जरूरी है। नम्रता इंसान को जमीन से जोड़े रखती है और यही लंबे समय तक उसकी सफलता का कारण बनती है। संस्कार बचपन में ही घर से मिलने शुरू हो जाने चाहिए और घर में मन को यह ध्यान रखना चाहिए कि शुरू से ही बच्चों के अंदर ऐसे संस्कार कूट-कूट कर भर की यह उसके सफल होने का माध्यम बन सकेकिसी व्यक्ति की महानता उसके जीवनकाल की लंबाई से नहीं, बल्कि उसके गुणों, कर्मों और चरित्र से निर्धारित होती है।
व्यक्ति का महत्व उसके भीतर मौजूद दया, ईमानदारी, ज्ञान, त्याग और संयम जैसे गुणों से बढ़ता है। अच्छे कार्य और दूसरों के प्रति सकारात्मक व्यवहार ही व्यक्ति को समाज में सम्मान और महानता दिलाते हैं। लंबी उम्र पाना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन यदि जीवन में अच्छे गुण और कर्म नहीं हैं, तो वह महानता नहीं ला सकता। इसके विपरीत, एक कम उम्र का व्यक्ति भी अपने असाधारण गुणों और कार्यों से महान बन सकता है।
जैन धर्म में इस सिद्धांत को बहुत महत्व दिया जाता है, जहां व्यक्ति की आत्मा की शुद्धता और कर्मों की पवित्रता को उम्र से कहीं अधिक श्रेष्ठ माना जाता है। पूर्व अध्यक्ष पूरणमल सेठी, वर्तमान कार्यकरिणी के सदस्यों एवं बाहर से आए अतिथिगण के अलावा अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल, मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा, माणकचन्द काला, नरेन्द्र पांड्या, प्रमोद झांझरी, कैलाशचन्द बड़जात्या, चेतन पाटनी, टिकमचन्द छाबड़ा, सुबोध जी बड़जात्या, मनोज जी काला, सौरभ विनायक्या, राजेश छाबड़ा,और समाज के कई लोग धर्म सभा में उपस्थित थे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।