- न कोई थकान, न किसी प्रकार का आलस्य और ना ही किसी प्रकार का शारीरिक मानसिक तथा भावनात्मक अपवित्रता.. स्वत: स्फूर्त कठोर अनुशासन
त्रिवेणी दास
एबीएन सोशल डेस्क। ना शांति समिति की बैठक, न कोई दंगा-फसाद, न इंटरनेट कनेक्शन को बाधित करना, ना कोई शंका ना ही कोई डर, श्रद्धा एवं स्वेच्छा से घाटों की सफाई, पूजा सामग्री को नि:शुल्क उपलब्ध कराना, शराब की दुकानों को बंद करने की आवश्यकता नहीं है ।
ठेकुआ का प्रसाद प्रत्येक घर में स्वयं ही निर्माण करना, छठ व्रतियों के आने जाने वाले मार्ग का सफाई पानी से पवित्र करना, छठ घाट में ऊंच नीच जाति पाति का भेद मिट जाना, कोई फिल्मी गीत नहीं केवल और केवल छठ के लोकगीत ; यह सब कुछ आस्था का चमत्कार है।
सूर्य भगवान को अर्घ्य का समर्पण और संपूर्ण अनुष्ठान में कोई पंडित नहीं कोई पुजारी नहीं मंत्र के रूप में श्रद्धा, भक्ति एवं विश्वास का निरंतर जाप; आस्था की शक्ति चमत्कृत करती है।
चार दिनों तक चलने वाला छठ के अनुष्ठान में न कोई तामझाम, ना कोई दिखावा और न ही निमंत्रण का इंतजार बस केवल जिसे जितना बन पड़े सहयोग ही सहयोग। प्रमाणित होता है कि हमारे अंदर आस्था के अनुपात से कई गुना अधिक परिणाम हमारे प्रत्येक कार्यों में उत्पन्न किया जा सकता है; यदि हमने आस्था के महत्व को व्यक्तिगत जीवन में अंगीकार कर लिया हो।