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शारदीय नवरात्रि कल से

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शारदीय नवरात्रि कल से
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  • नवरात्रि शक्ति, भक्ति, श्रद्धा, संयम, साधना और संस्कारों का महान पर्व : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत एक ऐसा देश है जहां हर पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक उन्नयन का संदेश होता है। 

ऐसा ही एक पर्व है शारदीय नवरात्रि, जो इस वर्ष 22 सितंबर दिन सोमवार से आरंभ हो रहा है। यह पर्व माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का महापर्व है, जो आत्मशुद्धि, शक्ति और भक्ति का प्रतीक है।नव-रात्रि का अर्थ है नौ रातों का उत्सव, जिसमें देवी दुर्गा के नवदुर्गा रूपों की पूजा होती है। यह पर्व अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चलता है। 

माना जाता है कि इन नौ दिनों में देवी शक्ति पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और असुरों का संहार करती हैं। शारदीय नवरात्र को देवी शक्ति की आराधना का श्रेष्ठ काल कहा गया है। यह न केवल धर्म और आस्था का पर्व है, बल्कि यह आत्मनिरीक्षण, संयम और साधना का भी समय है। 

इन नौ दिनों में माँ नव दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है:-1. शैलपुत्री-आरंभिक ऊर्जा का प्रतीक,2. ब्रह्मचारिणी-तपस्या और साधना की देवी,3.चंद्रघंटा- शांति और शक्ति का संतुलन, 4. कूष्मांडा-ब्रह्मांड सृजन करने वाली,5. स्कंदमाता- मातृत्व और संरक्षण की देवी, 6.कात्यायनी-दुर्गा का युद्ध रूप,7.कालरात्रि- नकारात्मकता का नाश करने वाली, 8. महागौरी- करुणा और शुद्धता की प्रतीक, 9. सिद्धिदात्री – ज्ञान और सिद्धियों की दात्री, नवरात्रि में लोग सात्विक भोजन करते हैं और मानसिक एवं शारीरिक शुद्धता बनाए रखते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित कर देवी का आवाह्न किया जाता है। दुर्गा सप्तशती पाठ प्रतिदिन देवी के मंत्रों, स्तुतियों और पाठ का आयोजन होता है। 

डांडिया एवं गरबा, गुजरात और पश्चिम भारत में यह सांस्कृतिक रूप से अत्यंत लोकप्रिय है।अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं को देवी के रूप में पूजकर भोजन कराया जाता है। नवरात्रि केवल देवी की पूजा भर नहीं है, यह आत्मा को ऊर्जा देने वाला पर्व है। यह समय है अपने अंदर की नकारात्मकता को खत्म कर सकारात्मकता का दीप जलाने का। 

यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में हर असुर (अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह) पर विजय पाई जा सकती है, यदि श्रद्धा, संयम और शक्ति हमारे साथ हो। यह पावन पर्व, हम सभी को एक अवसर देता है—धार्मिक आस्था के साथ-साथ आत्मचिंतन और आत्मविकास का। आइए इस नवरात्रि, देवी माँ से यही प्रार्थना करें कि वे हमें शक्ति दें, सद्बुद्धि दें और जीवन में धर्म, भक्ति एवं सेवा की भावना बनाए रखें।

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