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श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मना रुक्मणी विवाह

श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मना रुक्मणी विवाह
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*प्रेस विज्ञप्ति* 
*श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस मे*

*रुक्मणी विवाह, महारास और उद्धव गोपी संवाद से भक्त भाव विभोर हुए*

रांची । अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला मंच के द्वारा आयोजित *श्रीमद् भागवत कथा* के छठे दिवस में *रुक्मणी विवाह, महारास और उद्धव गोपी संवाद* मां चैतन्य मीरा के द्वारा सुनाया गया । साथ ही *कृष्ण रुक्मणी विवाह* के उपलक्ष में एक जरूरतमंद जोड़े का विवाह भी करवाया गया एवं उसे घर की जरूरत की सामग्री एवं उपहार दिए गए। कथा के प्रारंभ में संस्था के सदस्यों के द्वारा आरती की गई। तत्पश्चात गुरु मां ने सभी को ध्यान के माध्यम से कृष्ण से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने बताया की कुछ क्षण के ध्यान से ही यदि हम शांति महसूस कर सकते हैं, सकारात्मक अनुभूति का अनुभव कर सकते हैं तो सोचिए नित्य यदि हम योग और ध्यान करें तो हमारा शरीर मानसिक तनाव अनिद्रा जैसी बीमारियों से दूर होकर एक अलग आनंद और भक्ति का अनुभव प्राप्त कर सकता है। 
उन्होंने बताया कि कृष्ण की एक बांसुरी की धुन पर समस्त गोपिया दौड़ी चली आई थी और कई कई समय तक उनके साथ रास रचाती थी । हर गोपी के दो रूप हो गए थे एक शरीर जो महारास में होता था और कन्हैया ने एक ऐसा वातावरण बना दिया था की एक और वही गोपी अपने अपने घरों में अपने दैनिक कार्य करती रहती थी । जब कृष्ण को मथुरा जाना पड़ा तो समस्त गोप गोपी इस प्रकार से हो गए कि उनसे उनका सब कुछ अलग हो रहा है । कई दूर तक वह कृष्ण के साथ उनके रथ के पीछे-पीछे दौड़ते रहे। भक्ति और प्रेम का अद्भुत मिलन क्या है यह हमें बृजवासियों से सीखना चाहिए।
आज भी जिस प्रकार से यमुना मैया वृंदावन में सभी को दर्शन दे रही है लोग किस प्रकार से उसका आनंद प्राप्त कर रहे हैं यह प्रेम और भक्ति नहीं तो क्या है।  प्रेम की असली परिभाषा ही गोपियां है जब उद्धव गोपियों को समझने जाते हैं तो गोपियों का प्रेम भाव देखकर उनकी कृष्ण के प्रति प्रेम में भक्ति को सुनकर वह समझ गए कि उनका ज्ञान इस प्रेम के आगे शून्य है।  गुरु मां ने बताया कि जब हम किसी से प्रेम करें तो हमें ज्ञान नहीं लगना चाहिए। आज परिवार में जो लोग एक नहीं हो रहे हैं ।जो आपसी गृह क्लेश चल रहे हैं ।उनका एक ही कारण है वह प्रेम भूल जाते हैं और ज्ञान का ज्यादा उपयोग कर लेते हैं। और यही हमें एक दूसरे से अलग करता है।  कथा के अंत में किस प्रकार से कन्हैया जी ने रुक्मणी जी का हरण किया और उनसे विवाह किया कथा के माध्यम से गुरु मां ने बताया । इस मनोहर झांकी के दर्शन करके सभी भक्त मंत्र मुक्त हो गए । सभी ने आनंद के साथ कृष्ण रुक्मणी की वरमाला करवाई ।मंगल गीत गाए और आपस में सभी ने नृत्य के साथ एक दूसरे को बधाइयां दी। कथा में मुख्य रूप से नीरा बथवाल, रूपा अग्रवाल ,गीता डालमिया, अनसूया नेवटिया, अलका सरावगी, मधु सर्राफ, उर्मिला पाड़िया, रीना सुरेखा,  प्रीती पोद्दार ,बीना मोदी, बीना बूबना, प्रीती बंका, ,प्रीती अग्रवाल, शोभा हेतमसरिया , संगीता गोयल,ममता बूबना, ललिता नारसरिया सीमा पोद्दार सरिता अग्रवाल, सीमा टॉटीया रीता केडिया, मंजू गाड़ोदिया, मंजू केडिया,बबीता नारसरिया,जया बिजावत, सुनीता मेवाड़ा, सुनीता सरावगी, करुणा अग्रवाल, मीरा टिंबरेवाल, शोभा जाजू, रेखा अग्रवाल, अनू पोद्दार, सुनैना लॉयलका, कलावती अग्रवाल सीमा अग्रवाल, विद्या अग्रवाल, रेनू छापड़िया,कमला  विजयवर्गीय, साक्षी अग्रवाल, पुष्पा खेतान, पदमा बंका, कुसुम मोर, नैना मोर आदि बहने उपस्थित थी। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी


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