पर्युषण पर्व का आज छठा दिन जप दिवस के रूप में मनाया गया,जैन श्वेतांबर तेरापंथ संघ का पर्युषण महापर्व प्रगति पर है
टीम एबीएन, रांची। दिगंबर जैन भवन में आज इस आठ दिवसीय पर्व का छठा दिन जप दिवस के रूप में मनाया गया। पर्युषण में आज के आयोजित कार्यक्रम में उपासिका संतोष श्रीमाल एवं सीमा डुंगरवाल के सानिध्य में दिगंबर जैन भवन में प्रवचन हुआ। मौके पर जप के महत्व के बारे में उपासिका जी ने विस्तार से उपस्थित श्रावक समाज को जानकारी दी।
उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि पवित्र मंत्र के जाप से मन सबल बनता है। इससे विघ्न बाधाएं दूर होती है। मंत्र जाप की विधि बताते हुए श्रीमती डुंगरवाल ने बताया कि मंत्र जाप में उच्चारण की शुद्धि का विशेष ख्याल रखना चाहिए। नियमितता,एक ही स्थान का चयन हो तो इसका विशेष महत्व है। उन्होंने जप के महत्व को बताते हर कहा कि नमस्कार महामंत्र और ओम भिक्षु का जाप मनोबल का विकास करता है।
आचार्य महाप्रज्ञ जी की पुस्तक मंत्र एक समाधान सबके लिए पठनीय है। जिसमें जैन दर्शन के कर्मवाद की चर्चा की गई, कर्मवाद को ठीक से समझ लेने पर आचरण नैतिक बन जाता हैं। जप करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की और होना चाहिए। एक जप का एक निश्चित आसन तथा स्थान होना चाहिए। इस तरह मंत्रो का जप करने से उसका प्रभाव अत्यधिक होता हैं।
एक छोटी सी कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार देवताओं और असुरों के बीच संग्राम चल रहा था। तब देवताओं ने युद्ध जितने के लिए ध्यान तथा मन्त्रों का उच्चारण कर रहे थे, असुर भी ध्यान एवं मंत्र का उच्चारण करने लगे। देवताओं ने सही क्रिया विधि से और शुद्ध रूप से सात्विक मंत्र से ध्यान किया परन्तु असुरों ने मंत्रो का अशुद्ध उच्चारण तथा सही क्रिया विधि से ध्यान नहीं कर सके सो उसका फल देवताओं को मिला और वे संग्राम जीत गए।
अर्थात जप, ध्यान, मंन्त्रों का उच्चारण करते हुए हमें सात्विक मन से सही क्रिया विधि से तथा अक्षरों को शुद्ध पढ़ना चाहिये ताकि उसका प्रभाव व्यर्थ न जाये। आज 24 घंटे का नमस्कार महामंत्र का जप लगातार चल रहा हैं जो कि आज सुबह 6 बजे से कल 6 बजे तक चलेगा। आज के व्याख्यान में अध्यक्ष विमल दस्सानी, लालचंद बोथरा, दिलीप बोहरा, अशोक सुराणा, धर्मेंद्र बोहरा, हुकमी चंद चौरडिया, भावना बेगानी, नेहा बेगानी, ज्योति दुग्गड के अलावा काफी संख्या में श्रावक उपस्थित थे।