गायत्री-साधना, यज्ञीय अनुष्ठान सर्वसुलभ,सर्वोपयोगी और फलदायी है : टोलीनायक
टीम एबीएन, रांची। गायत्री शक्तिपीठ धूर्वा सेक्टर टू में सात दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का समापन गुरुवार को 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, गायत्री दीक्षा, यज्ञोपवित व पुंसवन संस्कार सहित बहुत हर्षोल्लास आनन्दमय वातावरण में जयघोष सहित हुआ। रांची उपजोन समन्वय,रांची शहर व जिलांतर्गत प्रखंड के सेवाभावी, समयदानी साधक-शिष्य भाई-बहनों को बहुत अच्छी तरह सम्मानित कर विदाई हुई।
शक्तिपीठ में शामिल प्रशिक्षुओं ने बताया कि सत्र संचालन, आवासीय व भोजन व्यवस्था बहुत सुन्दर व सराहनीय थी और उस टीम को धन्यवाद दिया तथा कहा कि इस सत्र में प्रशिक्षण विषय पाठ,जप-अनुष्ठान, योगाभ्यास, साधना, स्वाध्याय, संयम सेवा समयदान श्रमदान सारी व्यवस्था में भागीदारी करते हुए हर्ष आनन्द उल्लास सहित सद्ज्ञान, सत्कर्म, सद्भाव, एकता समता का अनुभव व वातावरण का दर्शन हुआ।
शान्तिकुञ्ज टोली में प्रवचन कर्ता और ढपली वादक भी शामिल प्रशिक्षु, जिज्ञासु की प्रश्नोत्तरी से खुशी जाहिर की।अगले प्रशिक्षण सत्र कार्यक्रम आयोजन के लिए साहिबगंज के लिए रवाना हुई। इस दौरान टीम नायक ने बताया कि गायत्री-साधना,यज्ञीय अनुष्ठान सर्व सुलभ, सर्वोपयोगी और फलदायी है। उन्होंने बताया कि मनुष्य शरीर में अनेक विलक्षण शक्तियां सन्निहित हैं। यह तथ्य अब वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं।
विस्तार से बताया कि ये शक्तियाँ शरीरस्थ कुछ केन्द्रों व ग्रंथियों पर संचालित व प्रभावित करती हैं। अनेक उदहारण दृष्टांत सहित बताया कि कैसे गुरुदेव पांच शरीर से भी कार्य करते थे। यह निश्चित फलदायी साधना है। आहार विहार प्राकृतिक व्यावहारिक, धर्म संगत और सात्विक रखना उत्तम है।
टोली नायक ने बताया कि गायत्री और यज्ञ पर गुरुदेव वेदमूर्ति- तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा गायत्री मंत्र और यज्ञ की आध्यात्मिक महत्ता को गहराई से प्रस्तुत किया है, जो गायत्री मंत्र के दार्शनिक और वैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करती है, यह आत्म-जागरण, जनजागरण और मानसिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
साथ ही यज्ञ की प्रक्रिया और जीवन में इसके प्रभाव को सरलता से समझाया गया है। विचार क्रांति अभियान, युग निर्माण योजना, सांसारिक, भौतिक जनों एवं आध्यात्मिक साधकों के लिए बहुत प्रेरणादायी व मार्गदर्शक है।
प्रशिक्षण सत्र समापन के दौरान कहा कि यह दिव्य ब्राह्मी प्रसाद औरों को बांटिए। यह पुण्य प्रसाद वितरण एक पुण्य कर्म और आवश्यक धर्म कृत्य है। अंत में लोकहितार्थ मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ और शांतिपाठ कर समापन किया गया। दोपहर भोजनोपरांत सभी साधक-शिष्य भाई-बहन विदा किये गये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।