कार्यक्रम गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-2 धुर्वा प्रांगण में सम्पन्न
वैज्ञानिक अध्यात्मवाद से युवावस्था में दिव्यता का प्राकट्य हो : राजू कुमार
टीम एबीएन, रांची। रांची अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार युवा प्रकोष्ठ के निर्देशन में जिला स्तरीय एक दिवसीय युवा सुपर 50 प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-2 धुर्वा, रांची प्रांगण में आयोजित हुआ। इसमें झारखंड प्रांत के युवा सुरेश यादव, नीरज महतो, प्रहलाद घोष, अमित बर्मा एवं वीर जवाहर के मार्गदर्शन में पूज्यवर गुरुदेवश्री के विचारों को बताया गया।
मंच संचालन रांची जिला युवा समन्वयक मनोज सोनी ने किया। जिले के सभी युवा सुपर-50 के सदस्यों ने जिले के गांव-गांव और स्कूलों तक पहुंच कर नये युवाओं को खोजने और प्रशिक्षित करने का संकल्प लिया। इस वर्ष 2025 में युवा मंडल गठन, पौधों का रोपण, विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के साथ बाल संस्कार शाला पूरे जिले में चलाने का संकल्प उभर कर आया। इस प्रशिक्षण में सप्त आंदोलन के तहत साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वालंबन, नारी जागरण, कुरीति उन्मूलन, पर्यावरण पर विस्तार से युवाओं को जनजागरण के तरीके बताये गये।
कार्यक्रम में जिला युवा समन्वयक मनोज सोनी, जिला युवा महिला समन्वयक सुलोचना सहदेव, जिला युवा सह समन्वयक राजू कुमार, जिला युवा महिला सह समन्वयक सुश्री श्रेया राय, सप्त आंदोलन समन्वयक, जिला सप्त आंदोलन समन्वयक नीरज कुमार, सप्त आंदोलन सह समन्वयक राजपति शर्मा, कौशल प्रशिक्षण सह समन्वयक अभिषेक कुमार सहित सैकड़ों परिजन उपस्थित रहे। इसमें अन्य सहायक इकाई प्रकोष्ठ के समन्वयक की भागीदारी रही।
युवा जागृति कार्यक्रम दिया (डिवाइन इंडिया यूथ एसोसिएशन) जो गायत्री परिवार की युवा शाखा है। इसका मिशन है प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के माध्यम से युवाओं की जन्मजात क्षमता का दोहन करके दिव्य भारत का निर्माण करना और राष्ट्र निर्माण की रचनात्मक गतिविधियों का संचालन करना।
दृष्टिकोण है : शिक्षित, स्वस्थ, आत्मनिर्भर, विनम्र और संवेदनशील युवाओं द्वारा दिव्य भारत का पुनर्निर्माण करना। हमारे उद्देश्य : युवाओं के सपनों में आदर्शवाद लाना, युवाओं को स्वस्थ, स्वावलंबी, शिक्षित और संवेदनशील बनाना। भारतीय युवाओं की विचार प्रक्रिया को नयी दिशा देना। शांति, सद्भाव और सतयुग की वापसी में योगदान।
वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के माध्यम से युवावस्था में दिव्यता का प्रकटीकरण होना। पूज्य गुरुदेव को 10 हजार हीरों का हार पहनने की इच्छा थी। ऐसे हीरे जो उनके कार्यों को फैला सकें, उनके हाथ और पांव बन चलते-फिरते शक्तिपीठ की भूमिका निभा सकें।
प्रत्येक युवा सप्ताह में 2-3 रविवार समयदान करेगा और अंत में सहायक युवा डाक्टर दीपक कुमार द्वारा अपने संक्षिप्त उद्बोधन, धन्यवाद ज्ञापन तथा शांति पाठ कर एक दिवसीय युवा शिक्षण प्रशिक्षण शिविर का समापन शांतिपाठ से समापन कियागया। उक्त जानकारी रांची के युवा सह समन्वयक राजू कुमार ने दी।