एबीएन न्यूज नेटवर्क, गिरिडीह/ रांची। मधुबन थाना क्षेत्र सिनीडीह में मां विपदतारणी की पूजा की सिनीडीह काली मंदिर समिति ने विशेष व्यवस्था की थी। विपदतारणी की पुजा सुहागिन महिलाएं अपने पति संतान एवं पुरे परिवार के कल्याण के लिए करती है रथयात्रा के बाद। मां विपदतारणी मां दुर्गा के ही एक अन्य स्वरूप है। इस पूजा में ब्रतसूत्र, रक्षासूत्र बांधने की परंपरा है जो 13 दूब से तैयार किया जाता है।
महिलाओं ने उपवास रखकर इसे तैयार करती हैं। मान्यता है कि यह सूत्र बांधने से पति एवं संतान की आने वाली हर विपत्ति टल जाती है। नवागढ़ मथाटांड़ के आचार्य सुकुमार बनर्जी एवं गुरु दास चटर्जी ने मां विपदतारणी से क्षेत्र की सुख शांति एवं जनकल्याण हेतु पूजा आराधना किये। विपदतारणी मंत्र ऊं हीं विपदतारणी दुर्गाये नम: के मंत्रोच्चार से श्रद्धालुओं ने मां से हर तरह की विपत्ति हरने की प्रार्थना करती हैं।
मां विपदतारणी को 13 प्रकार के फल फूल मिठाई पान सुपारी दूब का भोग लगाया जाता है। बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने परिवार के कल्याण की कामना के साथ पूजा अर्चना की। मां से आशीर्वाद प्राप्त किया।
मौके पर पूर्व जिला परिषद सदस्य अंजना देवी, जया देवी, बिंदु देवी, आलता देवी, पार्वती देवी, उर्मिला देवी, छाया देवी, उषा देवी, रिंकी देवी, सुलेखा देवी, सुनीता देवी, लखी देवी, गंगा देवी, सीमा देवी, चंपा देवी, संतोषी देवी, वंदना देवी, फूला देवी, सुधा देवी, भारती देवी, पिंकी कुमारी, लाली देवी, ओरा देवी, सरस्वती देवी, राधा कुमारी, शारदा कुमारी, पूजा देवी, साधना देवी, पूनम देवी, प्रेमलता देवी, रीना देवी, सुमा देवी, सुशीला देवी, बिट्टू चौहान, लालू बाउरी, आनंद बाउरी, साहिल बाउरी, निखिल बाउरी, मनु कुमार साव, बिट्टू बाउरी, करण बाउरी, रामजी चौहान समेत कई अन्य लोग शामिल थे।