गायत्री सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी एवं विशिष्ट साधना है : समूह प्रतिनिधि
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार अंतराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एकादशी व्रत-उपवास जप-अनुष्ठान समूह सानिध्य में आनलाइन 24 घंटे का गायत्री महामंत्र का जप-अनुष्ठान विधि-विधान से गायत्री माता और गुरु-ईश ध्यान नमन , वंदन, पूजन-अर्चन सहित संपन्न हुआ।
इसमें प्रतिनिधिमंडल ने सभी से अनुरोध किया कि इस दैवीय योजना में गृहे गृहे आवासीय तपोवन में समयदान निर्धारित कर भारत राष्ट्र के नव निर्माण तथा सभी के लिए सद्बुद्धि व उज्वल भविष्य की प्रार्थना एवं सद्भावना के साथ सभी अपने बहुमूल्य समय का एक अंश अवश्य देने का प्रयास करें। जप-अनुष्ठान सुबह चार बजे से दूसरे दिन चार बजे तक निर्धारित था।
जप-अनुष्ठान समूह में बताया गया कि गायत्री महामंत्र में सद्बुद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई है। इसके 24 अक्षर में 24 अमूल्य शिक्षा-विद्या के संदेश भरे हुए हैं। उन शिक्षाओं में वे सभी आधार मौजूद हैं, जिन्हें हृदयंगम करने वाले का सम्पूर्ण दृष्टिकोण शुद्ध और भ्रम- जन्य अविद्या का नाश हो जाता है। गायत्री महामंत्र की रचना ऋषियों के वैज्ञानिक आधार पर हुई है।
जो अपने अंत:करण में सद्बुद्धि को जितना स्थान देता है, उसे उतनी ही मात्रा में आनन्दमयी स्थिति का अनुभव व लाभ प्राप्त करता है। आगे बताया गया कि परमात्मा से निकटता का साधन है अंत:करण से प्रार्थना। बताया कि शास्त्रकारों ने गायत्री की सर्वोपरि स्थान, स्थिति, शक्ति और इसकी उपयोगिता को एक स्वर से स्वीकार किया है।
इसमें निर्मल भावना, सद्विचार और सर्वोत्कृष्ट करूणा एक दैवी गुण व आत्म प्रकाश है। सभी शामिल साधक-शिष्यों ने सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्जवल भविष्य की मंगलमय मनोरथ से मंगलमय प्रार्थना की। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ-साधक और प्रचारक जय नारायण प्रसाद ने दी।