Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
समाज

आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम अध्यक्ष ब्रह्माकुमारी मातेश्वरी सरस्वती का स्मृति दिवस

आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम अध्यक्ष ब्रह्माकुमारी मातेश्वरी सरस्वती का स्मृति दिवस
विज्ञापन

टीम एबीएन, रांची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम अध्यक्ष ब्रह्माकुमारी मातेश्वरी सरस्वती का स्मृति दिवस आज यहां चौधारी बगान, हरमू रोड ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया। मौके पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ सुबोध ने कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा जिन्हें मम्मा कह कर संबोधित किया जाता है वे ब्रह्माकुमारियों की प्रथम प्रमुख थीं, जिन्हें बुद्धि की देवी की रूप में जाना जाता है। मम्मा ने ब्रह्माकुमारी संगठन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और आध्यात्मिकता को पोषण दिया। 

महिला समिति अग्रवाल सभा की पूर्व अध्यक्ष मंजूला केडिया ने कहा कि मातेश्वरी जगदम्बा को संस्था के संस्थापक ब्रह्मा की आध्यात्मिक बेटी माना जाता है। मम्मा ने एक मार्गदर्शक, प्रशासक एवं आध्यात्मिक शिक्षक के रूप में सभी को पालन दिया। सभा में उपस्थित श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता सह समाजसेवी संजय सर्राफ ने कहा कि संस्था की प्रथम अध्यक्ष मातेश्वरी जगदम्बा ने ज्ञान ध्यान और सेवा के महत्व पर जोर दिया और सभी ब्रह्मावत्सों को एक भरोसा एक विश्वास के सिद्धान्त का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया। 

निर्मल बुधिया अग्रवाल सभा के सह मंत्री ने कहा कि संस्था  की प्रथम अध्यक्ष मातेश्वरी जगदम्बा ने सभी को स्वपरिवर्तन से विश्व परिवर्तन के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मम्मा का जीवन दिव्य गुणों व सेवा भाव से सम्पन्न था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अग्रवाल सभा के कार्यकारिणी सदस्य नरेश कुमार बंका ने कहा मातेश्वरी जी ने ब्रह्माकुमारियों के विकास और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और संगठन के सदस्यों को आध्यात्मिक ज्ञान और मार्गदर्शन प्रदान किया। 

अमरेंद्र विष्णुपुरी  समाजसेवी ने कहा आज के दिन हम सभी संस्था की प्रथम अध्यक्ष मातेश्वरी जगदम्बा के जीवन और शिक्षाओं पर तथा उनके द्वारा सिखाये गये मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। इस अवसर पर केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए कहा रूहानियत के गगनमंडल में ब्रह्मा संस्थापक के रूप में यदि ज्ञान सूर्य थे तो मातेश्वरी जी ज्ञान चन्द्रमा थीं। माँ ऐसी ज्ञान लोरी सुनाती थीं कि दु:ख अशांति शीतल मीठी छाँह में बदल जाती थीं। उन्होंने ज्ञान यज्ञ में अपने मन की पूर्ण आहुति दी तथा सर्वस्व प्रभु अर्पण किया। 

उनका तपोबल उच्च स्तरिय था। वे योग की शक्तिशाली स्टेज में स्थित होकर पवित्रता तथा दिव्यता की किरणें प्रकीर्ण करती थीं। उनके नयन स्थिर, चेहरे पर मुस्कुराहट एवं मुखमंडल दिव्य आभा को लिए हुए होता था। वे ब्रह्माकुमारी शिवशक्तियों की ऐसी अनुपम सेनानी थीं जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन विश्व कल्याण की सेवा में समर्पित किया हुआ था। सरस्वती नाम से पहले उनका नाम ओम राधे था। ओम की ध्वनि करते करते वह ईश्वरीय स्मृति में मग्न हो जाती थीं और उनकी रूहानियत भरी वाणी सबको ईश्वरीय प्रेम से भाव विभोर कर देती थीं। 

ज्ञातव्य हो इस अवसर पर मातेश्वरी जी के वन चरित्र पर आधारित नाटिका का बालिकाओं द्वारा मंचन किया गया साथ ही गाईडेड मेडिटेशन का भी अभ्यास कराया गया। सभा में उपस्थित सभी ब्रह्मा वत्सों ने पुष्पाजंली अर्पित किया। उक्त जानकारी देते हुए केंद्र प्रशासिका ने कहा कि यह मानवता की सेवा में नया युग आध्यात्मिक युग होगा। पवित्रता ही सुख शांति की जननी है। हर कीमत पर इसकी रक्षा करना अपना सर्वप्रथम कर्तव्य है।

विज्ञापन

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 10,178