- कांके रोड, प्रेमसंस मोटर के पास, राम मंदिर चौक पर, मारवाड़ी समाज की महिलाओं के द्वारा, आज होलिका पूजन का कार्यक्रम, विधि विधान से आयोजित
टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी समाज में होलिका दहन की एक विशेष परंपरा है। समाज की महिलाओं द्वारा पूरे विधि विधान के साथ होलिका दहन की परंपरा को पूरा किया जाता है। प्रत्येक घर में महिलाओं के द्वारा गोबर से बना बड़कुला तैयार की जाती है, जिसे पूरे धार्मिक रीति के साथ समाज की कुरीतियों को दूर करने के संकल्प के साथ दहन किया जाता है।
मारवाड़ी महिलाएं होलिका दहन के पूर्व ठंडी होली की पूजा करती है। घर के सभी सदस्य होलिका दहन से पूर्व घर पर पूजा करने के बाद होलिका दहन के लिए प्रस्थान करते हैं। किसी के हाथ में पूजा की थाल, किसी के हाथ में बड़कुल्ला की माला, किसी के हाथ में चना गेहूं की बाली वाला डंडा होता है।
भक्त प्रहलाद के रूप में केले के छोटे थम को लड़कियों के बीच रखा जाता है, जहां स्त्रियां कच्चे धागे से उसका फेरी लेती है। होलिका दहन से पूर्व इस केले की गांछी को निकालने के बाद अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है।
शास्त्र संवत वैदिक मंत्रोंचार व पूजा के उपरांत भक्त प्रहलाद के जयकारे के साथ अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है। अग्नि प्रवेश होते ही लोग बाग इसकी परिक्रमा शुरू कर देते हैं। समाज के लोग सुखा गिरी गोला चढ़ाते हैं एवं साथ में लाए गए जो चना गेहूं आदि की बाली को सेंक कर प्रसाद के रूप में घर लेकर लौट जाते हैं। लौटते समय साथ में ले किसी बर्तन में जेल कंडे को ले जाते हैं, जिसमें गूगल डालकर उसके धुएं से घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते है।
मारवाड़ी समाज में नवविवाहितों महिलाओं के लिए अपने मायके में पहली होलिका दहन की पूजा विशेष व महत्व रखती है। होलिका दहन की पूजा के बाद बेटियां अपने सुख में दांपत्य जीवन हेतु इसकी चार परिक्रमा करती है तथा दूसरे दिन इस राख में से थोड़ी राख को एकत्रित कर गणगौर की पूजा आरंभ करती है जो 16 दिनों तक चलती है। गणगौर देवी पार्वती और भगवान शिव के दिव्य प्रेम को प्रदर्शित करने वाला त्यौहार है।
होली हिंदुओं का एक बड़ा महान पर्व है जो असत्य पर सत्य के विजय का प्रतीक है। हर साल फागुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन और अगले दिन होली मनाई जाती है। उक्त जानकारी कांके रोड के वरिष्ठ समाजसेवी किशन गोयल ने दी।