गायत्री ईश्वरीय दिव्य शक्तियों का एक पुंज है : समूह प्रतिनिधि
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार साधक-शिष्यों ने विजया एकदाशी पावन व्रत पर उपवास एवं जप- अनुष्ठान आज प्रात: चार बजे से कल प्रात:चार बजे तक करने का सुविधानुसार समयदान किया और गृहे गृहे सर्व देव पूजन कर शुभारंभ किया। इसमें झारखंड प्रान्त एवं रांची शक्तिपीठ से जुड़े अनेक साधक- शिष्य गण शामिल हुए।
राष्ट्रीय गायत्री साधक समूह आनलाइन जप- अनुष्ठान समूह संचालक ने आनलाइन संदेश दिया कि इस महती दैव योजना में गृह जप में शामिल हो भारत राष्ट् के उत्थान, नवसृजन, सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन, सबको सद्बुद्धि उज्ज्वल भविष्य के निमित्त प्रार्थना में सभी साधक अपने बहुमूल्य समय का एक अंश देने का संकल्प लें और जाग्रत भाव से जप-अनुष्ठान में योगदान करें।
इस पावन अवसर पर शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा परिसर, स्थानीय पीठों एवं मंडल शाखाओं और गृहे-गृहे आवास में साधकों ने भागीदारी की। इसमें साधक सदस्यों ने मंगलाचरण से रक्षा विधान में गुरु, गायत्री, ब्रह्मा विष्णु, महेश तथा सर्वदेव आवाह्न, नमन वंदन सहित विधिवत षोडशोपचार, स्वस्तिवाचन सहित यज्ञ भी किया। अनेक साधकों ने सबके कल्याणार्थ गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय मंत्र के साथ अन्य सहायक मंत्रों के भी जप किए।
इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े अनेक वरिष्ठ साधक, युवा प्रकोष्ठ के सक्रिय साधक तथा कुछ विशिष्ट श्रद्धावान साधक परिजनों ने महामंत्र जप के साथ ध्यान, मंत्र लेखन एवं सामूहिक स्वाध्याय के साथ साथ गायत्री सहस्त्रनाम पाठ भी किये तथा इसके संबंधित विज्ञान पर चर्चा की। इस अवसर पर समूह प्रतिनिधि ने बताया कि गायत्री ईश्वरीय दिव्य शक्तियों का एक पुंज है।
गायत्री सहस्त्रनाम का श्रद्धापूर्वक पाठ का शास्त्रीय महात्म्य है। समूह प्रतिनिधि ने बताया कि सबने इस सामूहिक साधना से उत्पन्न ऊर्जा शक्ति को वेदमाता और गुरुसत्ताश्री के श्रीचरणों में नवयुग सृजन और विश्व कल्याण के निमित्त समर्पित करना है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह झारखंड प्रदेश प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।