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महाकुंभ एक दिव्य आस्था का पर्व

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महाकुंभ एक दिव्य आस्था का पर्व
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महाकुंभ भारतीय सभ्यता, संस्कृति और एकता का अद्भुत प्रतीक : संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि महाकुंभ भारत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक धार्मिक मेलों में से एक है, जो हर बार 12 वर्ष में एक विशेष स्थान पर आयोजित होता है। यह मेला हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें लाखों लोग धार्मिक स्नान के लिए एकत्रित होते हैं। 

महाकुंभ का आयोजन उन चार प्रमुख स्थानों पर होता है—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक—जिन्हें कुंभ स्थल के रूप में जाना जाता है। इन स्थानों का चयन भारतीय धार्मिक मान्यताओं और पुरानी कथाओं पर आधारित है। महाकुंभ का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है और इसकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता अत्यधिक है। 

किवदंती है कि देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन से अमृत कुंभ की प्राप्ति हुई थी और इस अमृत कलश को लेकर देवता और राक्षसों के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान अमृत से भरे कुंभ कलश को लेकर चार स्थानों पर बूंदें गिर पायी- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इन्हीं स्थानों पर हर बार 12 वर्ष के अंतराल में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। 

महाकुंभ का आयोजन एक अद्भुत धार्मिक उत्सव है, जहां लाखों श्रद्धालु पुण्य की प्राप्ति के लिए गंगा, यमुना, सरस्वती, या अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। इसे एक पुण्य अवसर माना जाता है, जहां एक जीवन में एक बार भाग लेना अनिवार्य माना जाता है। कुंभ स्नान से यह विश्वास होता है कि व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

महाकुंभ में धार्मिक अनुष्ठान, साधु-संतों की भव्य उपस्थिति, अखाड़ों के शाही स्नान और भव्य श्रद्धा आयोजन होते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। महाकुंभ के समय पूरे देश से लोग एकत्रित होते हैं, और यह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक माना जाता है। 

महाकुंभ की विशेषता यह है कि यह केवल धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, और एकता का अद्भुत प्रतीक भी है। यह पर्व हमें जीवन के उच्चतम आदर्शों की ओर प्रेरित करता है और समाज मे सामाजिक और सांस्कृतिक सौहार्द की भावना को प्रगाढ़ करता है। इस साल के प्रयागराज पूर्ण महाकुंभ का विशेष महत्व है क्योंकि यह 144 वर्षों के बाद हो रहा है।

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