गोवर्धन पूजा त्योहार मे प्रकृति के साथ मानव का सीधा संबंध : संजय सर्राफ
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि गोवर्धन पूजा पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा। सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है यह पर्व दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है।
इस वर्ष गोवर्धन पूजा का पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 1 नवंबर को सांय 6 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ हो रहा है तथा इसका समापन अगले दिन 2 नवंबर को रात 8 बजकर 21 मिनट पर होगा। इसलिए गोवर्धन पूजा 2 नवंबर को होगा। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा संबंध है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोक कथा है गोवर्धन पूजा में गोधन अर्थात गायों की पूजा की जाती है।
गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती है उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती है। गाय संपूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है गाय के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए इस दिन गोवर्धन पूजा की जाती है।
मान्यता के अनुसार एक बार भगवान इंद्र बृजवासियों से क्रोधित हो गए और भारी बारिश कर दी भगवान इंद्र के प्रकोप से बृजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली से उठा लिया था तभी से हर वर्ष गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व इंद्रदेव पर भगवान श्री कृष्ण की जीत का प्रतीक है। यह त्यौहार प्रकृति को समर्पित है।
इस पर्व पर लोग गाय के गोबर से भगवान श्रीकृष्ण एवं गोवर्धन पर्वत का चित्र को बनाकर उनकी उपासना करते हैं तथा पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। साथ ही प्रभु के प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। तथा कढ़ी और अन्नकूट चावल का भोग लगाया जाता है ? इस कार्य को करने से साधक को सुख समृद्धि में वृद्धि होती है।