दीदी ने कहा- पूजा-पाठ तक सीमित न रहें, उपासना की गहराइयों तक पहुंचें
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार इकाई युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची परिसर में महिला मंडल प्रतिनिधित्व में स्वाध्याय पाठ व संवाद हुआ। बताया गया कि परम सत्ता को मां के रूप में देखने और उस रूप में उसकी उपासना साधना आराधना करने का प्रचलन भारतीय संस्कृति की एक मौलिक विशेषता है, जिसकी मिसाल विश्व के अन्य धर्मों या आस्था परम्पराओं में दुर्लभ है। हर दृष्टि से यह भारत की ही विशेषता है।
नवरात्र के रूप में इसकी उपासना-आराधना का विशिष्ट पर्व मनाया जाता है। इसे शक्ति पर्व भी कहा जाता है। भारत में आदिकाल से चला आ रही शक्ति पूजा का यह पर्व आज भी अगम्य आस्था के साथ जारी है। बताया कि हमारी संस्कृति का प्रत्येक कालखंड इसकी चर्चा, विवेचना एवं साधना से भरा पड़ा है। महाभारत युद्ध आरंभ होने से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्गा मां की उपासना अर्जुन से विजय के लिए करायी थी। दीदी ने कहा कि नवरात्र की ऋतु संधि की वेला स्वयं में विशेषता लिए होती है। इस समय समूची प्रकृति अपने चरम उत्कर्ष पर होती है।
आध्यात्मिक साधनाओं के लिए इस ऋतुसंधि नवरात्र से बढ़कर और कोई अवसर नहीं हो सकता है। गुरुवर श्रीपूज्यवर की युग निर्माण योजना, विचार क्रांति अभियान व सत्संकल्प पाठ के सूत्रों के अनुसार बताया कि यदि इसके साथ युग-संधि का दुर्लभ सुयोग जुड़ जाये तो इसका महत्व सौ गुना हो जाता है।
स्वाध्याय पाठ की चर्चा के उपरांत बताया कि गायत्री परिवार के नवरात्र महापर्व में लघु व्यक्तिगत जप-अनुष्ठान व समूह जप-अनुष्ठान, मंत्र लेखन, गायत्री चालीसा पाठ, सहस्र नाम पाठ की महत्ता, विशेषता व उपयोगिता तथा नियत समय नियम संयम पर प्रकाश डाल शांतिपाठ कर सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय कामना की। पीठ व्यवस्था के अनुसार कल सुबह आठ बजे से नवरात्र अनुष्ठान की महापूर्णाहुति विधिवत 24 कुंडीय हवन-यज्ञ विधान से और भोजन प्रसाद अमृताशन भंडारा से होगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।