- गायत्री महिला मंडल का सत्संग, भजन कीर्तन, स्वाध्याय पाठ व संवाद हुआ
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ धूर्वा सेक्टर टू रांची में गुरुवार को महिला मंडल प्रतिनिधित्व में महामंत्र जप-अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सत्संग स्वाध्याय पाठ हुआ।
इस दौरान पूज्यवर श्रीगुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीरामशर्मा आचार्यजी की अखंड ज्योति पत्रिका का स्वाध्याय पाठ हुआ। दीदी ने पठन-पाठन कर बताया कि पूज्यवर श्रीगुरुदेव की युग निर्माण योजना सत्संकल्प अभियान अनुसार यह आज आवश्यक है कि महानता से नाता जोड़ने की सूझबूझ अपनाया जाये और इस विषय पर स्वाध्याय पाठ किया।
बताया कि महानता के साथ सम्पर्क, नाता जोड़ने, जुड़ने का अवसर सदा न आता, न मिलता है। कहा कि दैवी प्रयोजनों में यदि क्षुद्र से जीव भी तनिक सा सहयोग करे, तो दैवी सहायता अपरिमित परिमाण में मिलते हैं।यह सुनिश्चित है कि जिस किसी पर भगवत् कृपा बरसती है, वह महानता से अपना नाता जोड़ने की सूझबूझ सत्प्रेरणा के रूप में ही बरसती है। आज की विषम परिस्थितियों में यदि यह तथ्य हम सब भी सीख समझ कर महानता को अपना सकें तो निश्चित ही उस श्रेय को प्राप्त करेंगे जो प्रज्ञावतार की सत्ता इस संधिकाल की विषम बेला में अनायास ही हमें देना चाहती है।
इस बाबत युगानुकुल अनेकानेक उदाहरण दृष्टांत स्मरण कराये और प्रस्तुत किये गये।जैसे पारस पत्थर से काला- कुरूप, सस्ता लोहा का स्पर्श हो बहुमूल्य धातु में, स्वाति की बूंद सीप में पड़ने पर,पेड़ से लिपटकर बेल को ऊंचाई पाना।इससे महान पक्ष को कोई हानि भी नहीं और दुर्बल पक्ष को अनायास वरदान-स्वरूप लाभ प्राप्त होना भी श्रीहनुमान एवं वानरी सेना को प्रभुश्रीराम सेना में जुड़ समुद्र पुल बनाना, लांघना, लंका जलाना,पर्वत उठाना, पंचायतन का अंग बनना और गिलहरी को पूंछ में बालू लपेटकर समुद्र को पाटने की निष्ठा, पांडवों का श्रीकृष्ण रूपी महान सत्ता से जुड़ने वाली बुद्धिमत्ता ने महाभारत से विराट भारत का नवनिर्माण का श्रेयाधिकारी बना देना है।
बताया कि समर्पण का भाव, सामीप्य, सानिध्य महानता के साथ जुड़ने का जो उदाहरण हैं, बताते हैं व्यक्ति के व्यक्तित्व के लिए क्या वरेण्य है। अंत में शांतिपाठ व सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्जवल भविष्य की मंगल स्वस्तिवाचन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।