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गायत्री परिवार ने मनाया गुरु माताजी का महाप्रयाण दिवस

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गायत्री परिवार ने मनाया गुरु माताजी का महाप्रयाण दिवस
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  • शक्तिस्वरूपा परम वं गुरुमाताजी के महाप्रयाण दिवस पर गायत्री परिवार ने उनके संदेशों को स्मरणीय, अनुकरणीय बताया

एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार की परम पूज्य वंदनीया गुरुमाताजी का आज महाप्रयाण दिवस है। इस अवसर पर शान्तिकुञ्ज तत्वावधान व मार्गदर्शन में विश्व के समस्त इकाई शाखाओं में शिष्य सदस्यों ने कई कार्यक्रम करके उन्हें स्मरण कर श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की।

अखिल विश्व स्तरीय आनलाइन आध्यात्मिक स्वाध्याय पाठ-संवाद मंडल, जप-अनुष्ठान समूह प्रतिनिधित्व में रेखा बहिन ने बताया  कि परम पूज्य गुरुदेव प्रज्ञावतार के प्रतीक हैं एवं वंदनीया माताजी उनकी दिव्य शक्ति स्वरूपा हैं। उनके जीवन के विभिन्न आयामों को वर्णन करना सामान्य नहीं है। 

उनका जीवन दिव्यता से ओत-प्रोत था।मातृशक्ति समय समय पर भगवान के अवतार के साथ पृथ्वी पर उनकी सहयोगिनी के रूप में सदा आती रही हैं। गुरुमाता भगवती देवी ने गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार के ज्ञान समुच्चय को अपने हृदय की भक्ति भावना से दिव्य रूप देकर अमृतमय बनाकर अपने शिष्यों को वरदान आशीर्वाद प्रदान कर नवयुग सृजन में युग संजीवनी के दिव्य चिन्तन की बूंदों से शिष्यों को अभिचिंसन किया। 

आज भाद्रपद पूर्णिमा के पावन अवसर सह महाप्रयाण दिवस पर अखिल विश्व स्तरीय गायत्री परिवार सदस्यों शिष्यों ने सुबह से 24 घंटे का अखंड जप-अनुष्ठान, हवन-यज्ञ विधान और सायंकालीन दीपयज्ञ विधान करके सोल्लास संपन्न किया। परम वंदनीय माता जी के व्यक्तित्व से हमें यह गुण सीखने को मिलता है कि एक नारी के अंदर अपार शक्ति का भंडार होता है, उसे बस पहचाने की आवश्यकता होती है। माताजी ने हम सभी को अपने संगठन शक्ति के द्वारा,मातृ शक्ति के द्वारा संपूर्ण अखिल विश्व गायत्री परिवार को एक धागे में पिरोया है।

जब - जब कोई भी कठिनाइयां आती, तो उन्हें वह अपने मातृत्व के आंचल से समेट लेती। उनका यह आंचल किसी भी प्रकार की परेशानियों के लिए छोटा नहीं पड़ा। अतः हम सभी को उनके व्यक्तित्व से नेतृत्व क्षमता की सीख लेनी चाहिए, जिसके माध्यम से उन्होंने विपरीत से विपरीत परिस्थितियों को धैर्य एवं सरलता से हल किया।इस अवसर पर सभी ने उनके अन्नपूर्णा ममतामयी स्वरूप को शत-शत नमन किया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।

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