श्री सती दादी को दुर्गा का अवतार व नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है : संजय सर्राफ
टीम एबीएन, रांची। श्री राणी सती दादी जी का भादो बदी अमावस्या 3 सितंबर मंगलवार को मनाया जा रहा है। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि भादी मावस मारवाड़ी समाज का प्रमुख त्योहार है। अमावस्या की तिथि 2 सितंबर को सुबह 5:24 मिनट से शुरू होगी जो दूसरे दिन 3 सितंबर तक रहेगी। सनातन धर्म में अमावस्या को स्नान- दान के लिए शुभ माना जाता है।
भादी मावस की अमावस्या को सतियों की अमावस्या होती है। इस पूजा का पितरों के संदर्भ में बहुत महत्व है। इस दिन महिलाएं एवं पुरुष दादी जी की मंदिरों एवं अपने-अपने घरों में विधिवत पूजा करते हैं। तथा पितरों को धोक एवं दादी जी की जात दी जाती है।
पूजा में रोली, मोली, मेहंदी, चावल, नाल जोड़ी काजल, चूड़ी, सिंदूर, नारियल, गट, प्रसाद, दीपक, कलश, चढ़ाने के लिए रुपया, मीठा पूड़ा, घूघरे डिजाइन का पूड़ा, पूड़ी बनाते हैं। एक साफ पाटे पर रोली की सथिया बनाते हैं, दीपक जलाते हैं तथा तेरह रोली, चावल, मेहंदी, काजल की टिकी देते हैं। राणी सती दादी का वास्तविक नाम नारायणी है।
कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में चक्रव्यूह में वीर अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हुए थे इस समय उत्तरा जी को भगवान श्री कृष्ण जी ने वरदान दिया था कि तू कलयुग में नारायणी के नाम से सती दादी के नाम में विख्यात होगी। और हर किसी का कल्याण करेगी और पूरी दुनिया में पूजी जायेगी, इसी वरदान के स्वरूप श्री सती दादी जी आज लगभग 715 वर्ष पूर्व मंगल 1352 ईस्वी में सती हुई थी।
श्री राणी सती दादी का जन्म संवत् 1638 कार्तिक शुक्ला नवमी को डोकवा गांव में हुआ था। परम आराध्या दादी जी के प्रताप उनके वैभव और अपने भक्तों पर नि:स्वार्थ कृपा बरसाने वाली मां नारायणी सती दादी को मारवाड़ी समाज की कुलदेवी भी माना जाता है।
नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इष्ट देवी के रूप में श्री राणी सती दादी देवी दुर्गा का अवतार है। इस मान्यता के चलते माता के प्रतिरूप को त्रिशूल स्वरूप में प्रतिष्ठापित किया गया है। दादी का मंदिर स्त्री सम्मान ममता और स्त्री शक्ति का प्रतीक है।