टीम एबीएन, रांची। श्वेतांबर जैन धर्म संघ का महापर्व पर्यूषण पर्व 31 अगस्त से जैन मंदिर डोरंडा में एवं 01 सितंबर से दिगंबर जैन भवन में मनाया जायेगा। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ का डोरंडा जैन मंदिर में 31 अगस्त से एवं श्री साधुमार्गी जैन श्वेतांबर संघ एवं तेरापंथ धर्मसंघ का 1 सितंबर से दिगंबर जैन भवन में शुरू हो रहा है।
श्री श्वेतांबर जैन मूर्ति पूजक संघ का 31 अगस्त से पर्वाधिराज पर्यूषण जैन मंदिर डोरंडा में शुरू हो रहा है। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ, डोरंडा के तत्वावधान में चातुर्मास परम पूज्य श्री खतरगच्छाधिपति मणीप्रज्ञ सागर सूरीश्वर जी की परम पूज्य गुरूवर्या श्री लयस्मिता श्री जी, पु. अभिवर्षा श्री जी, पु.भव्योंदया श्री जी, पु. गुणोदया श्री जी, पु. जिनवर्षा श्री जी आदि ठाना 5 का भव्य चातुर्मास चल रहा है।
नित्य जप, तप, ज्ञान, ध्यान चल रहा है। पर्यूषण पर्व के दौरान जैन मंदिर डोरंडा में 31 अगस्त को स्नात्र पूजा, 2 सितंबर से प्रतिदिन, कल्पसूत्र वाचन, 4 सितंबर को भगवान महावीर जन्म वांचन, 7 सितंबर को सांवत्सरिक प्रतिक्रमण का कार्यक्रम होगा एवं साथ साथ प्रतिदिन व्याख्यान, धार्मिक अनुष्ठान, ज्ञानशाला, नित्य शाम में भक्ति भावना आदि का कार्यक्रम किया जायेगा।
दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में श्री साधुमार्गी जैन श्वेताम्बर संघ रांची ने 1 सितंबर से पर्युषण कार्यक्रम रखा है। मौके पर धर्म की प्रभावना करने स्वाध्यायी बंधु श्रीमान गौतम जी रांका और सुरेश जी बोरडिया मुंबई से रांची आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह प्रार्थना के पश्चात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक 1 सितंबर 2024 से प्रवचन होगा।
दोपहर में धर्म चर्चा और संध्या के समय प्रतिक्रमण होगी। इसके उपरान्त हर दिन अलग अलग कार्यक्रम आयोजित होंगे। 4 सितंबर 2024 को पारस हॉस्पिटल के सहयोग से निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर और चिकित्सक से निशुल्क परामर्श का आयोजन होगा। 8 सितंबर 2024 को संवत्सरी महापर्व का आयोजन किया जाएगा जो त्याग और तपस्या का प्रतीक है। क्षमा याचना और विदाई समारोह 9 सितंबर को आयोजित किया जायेगा।
जैनों के लिए पर्वाधिराज पर्युषण सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। आठ दिन का यह पर्व, जिसमें आत्मचिन्तन, तप-जप, त्याग, उपवास, भक्ति-भावना, पाप कर्म की निर्जरा आदि की जाती है। मनुष्य के द्वारा स्वयं के किये गये पापों का पश्चाताप का निरीक्षण किया जाता है एवं अधिक से अधिक धर्म ध्यान, तप आदि किया जाता है। पर्यूषण के अंतिम दिवस में सभी उपवास रखते हुए प्रतिक्रमण करके आत्मा की शुद्धि से एक दूसरे से मिच्छामि दुक्कड़म क्षमा याचना करते हैं। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।