एबीएन सोशल डेस्क। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर प्रारंभ हुई गायत्री परिवार के संकल्पित साधक-शिष्यों की विश्वस्तरीय चंद्रायाण व्रत उपवास साधना जो 19 जुलाई (गुरु-पूर्णिमा) से शुभारंभ होकर 19 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा को संपन्न होनी थी, वह श्रावण पूर्णिमा को संपन्न हुई।
साधना का मुख्य लक्ष्य ऊर्जा में आकर्षण, मनोबल, आत्मबल प्रदान करने वाले चंद्रमा का ध्यान, वरिष्ठ परिजनों के साथ छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा भी किया जाना रहा। साधक सामूहिक जप, गायत्री मंत्र-लेखन भी रहा। विश्वस्तरीय सामूहिक अनुष्ठान में सभी ने प्रतिदिन गृहे गृहे व शक्तिपीठों में सामूहिक साधना, स्वाध्याय साधना, चंद्र ध्यान साधना की थी।
देश विदेश से जुड़े सभी वरिष्ठ भी साधक-साधिका एवं नन्हें मुन्ने साधक परिजनों ने सामूहिक साधना से उत्पन्न ऊर्जा शक्ति को गुरुसत्ता के चरणों में नवयुग सृजन हेतु एवं विश्वकल्याण हेतु समर्पित किया। सोमवार सावन पूर्णिमा को इस उच्चस्तरीय आध्यात्मिक साधनात्मक चंद्रायण जप-अनुष्ठान अभियान की महापूणार्हुति ब्रह्मा विष्णु महेश एवं चन्द्रदेव सहित सर्वदेवों की विधिवत वैदिक विधान से विस्तृत रूप से संपन्न हुई।
इस अवसर पर शांतिकुंज से आदरणीया शैल जीजी के प्राप्त शुभकामना व बधाई संदेश को यज्ञाचार्य ने बताया। व्रतधारियों ने इस अवसर पर देवकन्या पूजन-अर्चन, नमन-वंदन व अभिनंदन सहित भोजन प्रसाद ग्रहण कराया।
फिर रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहनों ने रक्षासूत्र बंधाकर सोल्लास संपन्न किया और सबके लिए स्वस्थ-सुखद, आनंदमय मंगलमय वातारणपूर्ण जीवन के स्वस्तिवाचन पाठ किये। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर मासिक पूर्णिमा पर अखंड जप-अनुष्ठान करने वाले समूह भी 24 घंटे के आनलाइन जप-अनुष्ठान में शामिल हैं। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।