राजकुमारी पाण्डेय
एबीएन सोशल डेस्क। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण माह की पूर्णिमा को रक्षा बंधन या कहें कि राखी का त्योहार मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार यह पर्व 19 अगस्त 2024 सोमवार को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस त्योहार को मनाए जाने की पौराणिक मान्यताएं।
भविष्य पुराण में कहीं पर लिखा है कि सबसे पहले इंद्र की पत्नी शचि ने वृत्तसुर से युद्ध में इंद्र की रक्षा के लिए रक्षा सूत्र बांधा था। इसलिए जब भी कोई युद्ध में जाता है तो उसकी कलाई पर कलाया, मौली या रक्षा सूत्र बांधकर उसकी पूजा की जाती है। देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को अपना भाई बनाकर हाथों में अपने पति की रक्षा के लिए यह बंधन बांधा था और अपने बंधक पति श्रीहरि विष्णु को अपने साथ ले गई थी। हमें स्कंद पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत पुराण में मिलती है।
क्या है कथा
कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने अदिति के गर्भ से वामन अवतार लिया और ब्राह्मण के वेश में असुरराज राजा बली के द्वार भिक्षा मांगने पहुंच गए। चूंकि राजा बली महान दानवीर थे तो उन्होंने वचन दे दिया कि आप जो भी मांगोगे मैं वह दूंगा। भगवान ने बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि मांग ली। बली ने तत्काल हां कर दी, क्योंकि तीन पग ही भूमि तो देना था। लेकिन तब भगवान वामन ने अपना विशालरूप प्रकट किया और दो पग में सारा आकाश, पाताल और धरती नाप लिये। फिर पूछा कि राजन अब बताइये कि तीसरा पग कहां रखूं?
तब विष्णुभक्त राजा बली ने कहा, भगवान आप मेरे सिर पर रख लीजिए और फिर भगवान ने राजा बली को रसातल का राजा बनाकर अजर-अमर होने का वरदान दे दिये। लेकिन बली ने इस वरदान के साथ ही अपनी भक्ति के बल पर भगवान से रात-दिन अपने सामने रहने का वचन भी ले लिये। भगवान को वामनावतार के बाद पुन: लक्ष्मी के पास जाना था लेकिन भगवान ये वचन देकर फंस गयें और वे वहीं रसातल में बली की सेवा में रहने लगे। उधर, इस बात से माता लक्ष्मी चिंतित हो गई। ऐसे में नारदजी ने लक्ष्मीजी को एक उपाय बताया।
तब लक्ष्मीजी ने राजा बलि के पास जाकर राजा बली को राखी बांध अपना भाई बनाई और अपने पति को अपने साथ ले आई। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। तभी से यह रक्षा बंधन का त्योहार प्रचलन में हैं।
माना जाता है कि राजसूय यज्ञ के समय जब श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध कर दिया था तो तब उनकी अंगुली से खून बहने लगा था। इसे देखकर द्रौपदी ने तुरंत ही अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी अंगुली पर बांध दी थी।
इस कर्म के बदले श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को आशीर्वाद देकर कहा था कि एक दिन मैं अवश्य तुम्हारी साड़ी की कीमत अदा करूंगा। इन कर्मों की वजह से श्रीकृष्ण ने द्रौपदी के चीरहरण के समय उनकी साड़ी को इस पुण्य के बदले ब्याज सहित इतना बढ़ाकर लौटा दिया और उनकी लाज बच गई। कहते हैं कि इसी के बाद रक्षा बंधन पर बहन द्वारा राखी बांधने की परंपरा की शुरुआत हुई थी।
क्या है दूसरी कहानी
दूसरी कहानी यह है कि जब महाभारत का युद्ध शुरू हो रहा था, तब युधिष्ठिर कौरवों से युद्ध करने जा रहे थे। इस दौरान उन्हें सिर्फ यही चिंता थी कि युद्ध को कैसे जीता जाए? इस बात का निवारण जब भगवान श्री कृष्ण से पूछा गया तो उन्होंने सभी सैनिकों के हाथों में रक्षा सूत्र बंधवाने को कहा। श्रीकृष्ण के कहते ही सभी सैनिकों के हाथ में रक्षासूत्र बांध दिए गए और महाभारत में उनको जीत हासिल हुई। इसलिए भी रक्षा बंधन पर बांधे जाने वाले रक्षा सूत्र का काफी ज्यादा महत्व माना गया है।