गायत्री महामंत्र सस्वर पाठ व मातृ वंदना, गुरु वंदना से शुभारंभ हुआ आज का पांच जिला उपजोन समन्वयन संगोष्ठी
टीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार संगोष्ठी कार्यक्रम प्रारंभ पूर्व गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू में एक प्रसिद्ध व विशिष्ट वृक्ष कल्पतरू (वैज्ञानिक नाम एडेनसोनिया डिजिटाटा) का पौधरोपण हुआ। यह पौधरोपण रवि शंकर प्रसाद मुख्य तकनीकी अधिकारी, वन उत्पादकता संस्थान लालगुटवा रांची के सौजन्य से गायत्री शक्तिपीठ के अतिथि, विशिष्ट व प्रभारियों के सानिध्य में पौधरोपण कार्य विधिवत मांगलिक मंत्रोच्चारण, पवित्रीकरण, पृथ्वी पूजन, चंदन तिलक, रक्षासूत्र बांधकर, जगह का शुद्धिकरण और अभिसिंचन सहित स्वस्तिवाचन, पूजा-पाठ करके किया गया। इसके बाद संगोष्ठी कार्यक्रम प्रज्ञागीत गायन हारमोनियम व ढफली वादन साथ हुआ।
मां इतनी कृपा कर दो, इतनी दया कर दो, तुम से मांग रहे हम वरदान, देश धर्म-संस्कृति की खातिर हों जाएं, हम हंसते हंसते बलिदान, स्वयं भगवान हमारे गुरु ,परम सौभाग्य हमारा है, स्वयं नारायण नर तन धरे हमारे बीच पधारा है, समयदान व अंशदान मानव को श्रेष्ठ बनाता है, जो इसे अपनाता है, वह धन्य धन्य हो जाता है जैसे प्रज्ञागीतों, संगीतमय व डफली वादन के मधुर स्वर व करतल ध्वनि से गुंजायमान हुआ संगोष्ठी वातावरण।
अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शांतिकुंज के पूर्वीजोन प्रकोष्ठ से झारखंड प्रभारी श्रद्धेय त्रिलोचन साहू की उपजोन स्तरीय संगोष्ठी दिनांक 14/07/2024 (रविवार) को पूर्वाह्न 11 से गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची में आयोजित हुई। जिसमें गायत्री शक्तिपीठ एवं परिवार के उपजोन के 5 जिलों से जिला स्तर और प्रखंड स्तरीय समन्वय समिति के आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, युवा, दीया मंडल के सक्रिय, नैष्ठिक, गतिशील, उद्यमी प्रतिनिधि सदस्यगण, ट्रस्टीगण, प्रज्ञा/ महिला/ मंडल, युवा मंडलों के सभी सदस्यगण की उपस्थिति बहुत सुंदर सराहनीय रही। संगोष्ठी में उपजोन के पांचों जिला से करीबन डेढ़ सौ से अधिक सदस्यगण उपस्थित होकर सफल सुफल बनाये।
इससे संबंधित शांतिकुञ्ज मुख्यालय की परम आदरणीया जीजी के दिशा-निर्देश, पत्र एवं कार्यक्रम की सिड्यूल चर्चा हुई। बताया गया कि मिशन के कार्यक्रम स्वरूप को संगठनात्मक गतिविधियों के साथ और अधिक गति देने की आवश्यकता है। इसमें केंद्रीय प्रतिनिधि त्रिलोचन साहू, झारखंड प्रभारी राम नरेश प्रसाद, उपजोन प्रभारी श्रद्धेय उदय शंकर पंडित के पावन सानिध्य में एक विशिष्ट संगोष्ठी हुई। संगठनात्मक स्वरूप को मजबूत करना है इस विषय पर रांची जिला के सभी प्रखंडों और प्रखंडों के अंतर्गत पंचायतों व गांवों की चर्चा हुई।
शांतिकुञ्ज के तत्वावधान व मार्गदर्शन में कार्यक्रम को जमीन पर उतारना है, गतिशील व सार्थक बनाना है। रामनरेश प्रसाद ने बताया कि यह असामान्य व संकटग्रस्त समय है। संक्रांति काल है। यह परिवार संगठन अन्य से भिन्न है। यह अवतारी चेतना से संचालित है। यह साधारण समय नहीं है। दादा गुरुदेव व गुरुदेव के मध्य हुई लक्ष्य निर्धारित रचनात्मक लक्ष्यों का जिक्र हुआ। वायुमंडल का शुद्धिकरण, वातावरण का परिष्करण, नवयुग का सृजन (निर्माण), महाविनाश से बचाव जैसे कार्य, देवमानव का उत्पादन आदि अनेक गुह्य विषयों पर प्रकाश डालकर बताया। देश विदेश के शासनाध्यक्ष, धनाध्यक्ष, वैज्ञानिक गतिविधियों की स्थिति व विपरीत भयानक स्वरूप पर प्रकाश डाला।
त्रिलोचन साहू ने शांतिकुञ्ज मुख्यालय आदरणीय दीदी का पावन मार्गदर्शक संदेश सुनाये। गुरुमाता भगवती का जन्म शताब्दी सह दिव्य व प्रचण्ड अखंड ज्योति दीप का होने जा रहे 100 वर्ष के शताब्दी वर्ष पर मंगल कलश ज्योति यात्रा पर चर्चा व गुरुदेव श्री प्रज्ञावतार का नवयुग सृजन अभियान संदेश गावं गांव-गांव, घर घर जन-जन तक पहुंचाये जाने का कारण, साधन, प्रचार प्रसार मार्गदर्शन विस्तार से भगवान व भक्त के कल्याणप्रद संबन्धित अनेकानेक सटीक उदाहरण दृष्टांत से प्रस्तुत कर किया।
आगे मार्गदर्शन में बताया कि हर एक इकाई में स्थापित शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ, चरणपीठ को मजबूत संगठनात्मक, रचनात्मक सुपरिणाम देना है। इसके बाबत समयदान व अंशदान के योगदान पर चर्चाएं हुईं। अंत में आगामी झारखंड के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के बारे में दीपक दयाल प्रसाद ने संवाद किया और शांति पाठ, जयघोष तथा उपरांत भोजन प्रसाद ग्रहण कर गोष्ठी कार्यक्रम समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के रांची जिला समन्वयक जय नारायण प्रसाद, उपजोन समन्वयक दयाशंकर पंडित और रांची के व्यवस्थापक जटाशंकर झा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।