मानवीय उत्कर्ष वर्तमान समय का सबसे महत्वपूर्ण दर्शन पर स्वाध्याय हुआ
एबीएन सोशल डेस्क। आज गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में गायत्री महिला मंडल प्रतिनिधित्व में अखंड ज्योति पत्रिका का स्वाध्याय पाठ हुआ। परम पूज्य गुरुदेव वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन के दृश्य-अदृश्य, लौकिक- अलौकिक, दार्शनिक, तपस्वी, सिद्ध साधक, शुभचिंतक, लेखक, सुधारक, युगऋषि, युगद्रष्टा, युगस्रष्टा कई रूप में उनके उल्लेखनीय व्यक्तित्व पर स्वाध्याय किया गया।
उसमें गायत्री की 24-24 लाख की 24 महापुरश्चरण हो, सूक्ष्मीकरण हो, हिमालय का एकांतवास हो, चंद्रायण व्रत-उपवास की शृंखलाबद्ध तपस्या हो, उनके पास बैठने मात्र से ऊर्जा का एक ऐसा दिव्य संचार मन-मस्तिष्क में होना, उस पर वर्णन कर पाना संभव नहीं है।
गुरुवर श्री पूज्यवर लिखते हैं कि संकट की वर्तमान परिस्थितियों से तो मनुष्य स्वयं ही निपट लेता है, पर असामान्य संकटग्रस्त विपन्नताओं के स्वर उत्पन्न होने पर स्रष्टा को स्वयं ही सक्रिय होना पड़ता है। युग निर्माण योजना अपने समय की अवतार चेतना के क्रियाकलापों का मूर्तरूप ही कह सकते हैं, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक समाज की कायाकल्प व स्थापना करना है। उनके अनुसार पूरे मानव समाज को बदलना है।
इसी मानवीय प्रकृति के रूपान्तरण पथ को मानवीय उत्कर्ष पथ कहा जा सकता है।अत: माननीय उत्कर्ष से संबंधित समस्त विधाओं पर अब गंभीर अध्ययन व शोधकार्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। सत्संग का शुभारंभ गायत्री महामंत्र सस्वर पाठ, भजन-कीर्तन और समापन मंगलमय वंदना एवं शान्ति-पाठ से हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।