एबीएन सोशल डेस्क। नाट्य संस्था मैट्रिक्स (स्टेप फॉर ह्यूमनीटी) संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं कला संस्कृति विभाग झाराखण्ड सरकार के से आयोजित 3 दिवसीय नाट्य महोत्सव (नट रंग -3) का समापन नाटक राज रक्त का मंचन हुआ जिसमें नाटक राज रक्त एक पोलिटिकल ड्रामा है, जिसमें हम देखते हैं कि राज्य के कई उच्च पद के लोग एक साथ मिलकर राजा को गद्दी से हटाना चाहते हैं पर उन्हें कोई रास्ता नहीं नज़र आता।
कहानी में एक मोड़ ऐसा आता है जहां राजा अपनी प्रजा की भलाई के कुछ ठोस कदम उठाते हैं, जिसका राज्य के कई पद धारी लोग साथ नहीं देते और उनके खिलाफ हो जाते हैं। बस यही मौका उन उच्च कुल के लोगों को मिलता है जिसमें राजा का भाई नक्षत्रराय, राजा की पत्नी गुणवती और राज्य का पुरोहित रघुपति शामिल होते हैं, वे सभी नक्षत्रराय को राजा बनाने की लालसा देते हैं और उसे राजा के गोद लिए हुए पुत्र ताता की हत्या करवाने को उकसाते हैं।
जब ये बात पुरोहित के द्वारा पोषित पुत्र जयसिंह को पता चलती है, तो वो अपने पिता का साथ नहीं देना चाहता और उसे समझने की बेजोड़ कोशिश करता है। पर रघुपति अपने पुत्र की बात नहीं सुनता और कोई रास्ता ना पाकर जयसिंह स्वयं की जान दे देता है।
इधर नक्षत्रराय ताता को मारवा देता है। जब ये बात राजा को पता चलती है तो वो अपने भाई और पुरोहित को देश से 8 वर्ष के निर्वासन का दंड देता है। पुरोहित आत्मग्लानि में राज्य छोड़ कर चला जाता है पर नक्षत्रराय अपने भाई को मारने का निश्चय करता है।
नक्षत्ररय राज्य के बाहर के मुगल दुश्मनों से मिल जाता है और अपने भाई पर हमला कर के उसे मार देता है। गोविंद के मरने पर वो राज्य का राजा बन जाता है और गुणवती उसकी पत्नी। राजा बनने के बाद वो पुराने राजा के सभी को हटा कर अपने बनाये कानूनों को लागू कर देता है।
सोनु सोनार, शिवांग चौबे, शंकर पाठक, अंकिता केरकेट्टा, शर्मिष्ठा शर्मा, अंकित कुमार, शाश्वत चौधरी, किरणमय महतो, सनी देवगम, सुजल पासवान, श्वेता, सुशांत सरीन, गिरीश दत्त, मणिकांत और आकांक्षा ने इस नाटक में कमाल का अभिनय किया है, म्यूजिक - अभिराज कुमार, मेकअप - रीतू रागिनी और लाइट दिबाशीष दा ने किया।