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16 दिनों तक चला गणगौर पर्व विसर्जन के साथ हुआ समापन

16 दिनों तक चला गणगौर पर्व विसर्जन के साथ हुआ समापन
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टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी समाज का लोकप्रिय त्योहार गणगौर पर्व उमंग एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह अग्रवाल सभा के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि गणगौर पर्व मारवाड़ी समाज का प्रमुख त्योहारों में से एक है। 

यह पर्व होली दहन के दूसरे दिन से लगातार 16 दिनों तक कुंवारी लड़कियां एवं नवविवाहिता द्वारा ईशर-गोरा (शिव पार्वती) की पूजा करती है। आज सभी महिलाएं राजस्थानी परंपरागत पोशाक पहनकर पूरे विधि विधान से गणगौर की पूजन की। गणगौर को पारंपरिक व्यंजनों में मिठाई, फल, हलवा पूड़ी और गेहूं चढ़ाया गया। अनुष्ठान के साथ उद्यापन किया गया। महिलाएं आपस में अबीर-गुलाल लगायी। 

राजस्थानी गणगौर की मंत्रमुग्ध लोकगीतों के साथ नाचते गाते तथा तालाबों में गणगौर की प्रतिमा के विसर्जन के साथ 16 दिनों से चल रहा गणगौर महोत्सव का समापन हुआ। गणगौर पूजा हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को होती है इस दिन कुंवारी कन्या और सुहागन महिलाएं व्रत रखती है। माता पार्वती और साथ भगवान शिव की पूजा करती है। गणगौर दो शब्दों से बना है गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ पार्वती से है। 

वास्तव में गणगौर पूजन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा का दिन नवरात्रि के तीसरे दिन यानी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला गणगौर का त्योहार स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य प्राप्ति का पर्व है। गणगौर पर्व पवित्रता, भक्ति, वैवाहिक प्रेम का प्रतीक तथा सामूहिक पूजा, प्रार्थना और उत्सव के माध्यम से पारिवारिक बंधन, सामूहिक सद्भाव और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देता है।

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