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लो दिख गया चांद, ईद आज

लो दिख गया चांद, ईद आज
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  • ईदगाहों-मस्जिदों में होगी नमाज

आदिल रशीद 

टीम एबीएन, रांची। ईद का चांद बुधवार की शाम दिखा, गुरुवार को ईद मनायी जायेगी। ईदगाहों और मस्जिदों में गुरुवार 11 अप्रैल 2024 की सुबह नमाज अदा की जायेगी। एदारे शरिया झारखंड और इमारते शरिया झारखंड ने चांद की औपचारिक रूप से घोषणा कर दी हैं। चांद का दीदार होने के साथ ही ईद की खुशियां शहर की फिजा में घुल गयी। मस्जिदों में ईद नमाज से संबंधित एलान हुए, जबकि सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लगा रहा। लोग एक दूसरे को ईद की चांद की बधाई देते रहे।

शहर के विभिन्न मुस्लिम मोहल्लों में खुशी के इस मौके पर पटाखे छोड़े गये। ईद की तैयारियां रात से ही शुरू कर दी गयींं। सभी मुस्लिम मोहल्लों, चौक चौराहों, गली कूचों को कुमकुमे, चमचमाती रंग बिरंगे झालर, लाइट से सजाया गया। बच्चो ने रात रात भर जाग कर सजाने का काम किया। रमजान के मुकद्दस महीने की 30 तारीख को देखते हुए बुधवार को मगरिब की नमाज के बाद दरगाह में एदारा ए शरिया की बैठक मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी की सदारत में हुई। तो इमारत शरिया झारखंड की बैठक इमारत शरिया बिल्डिंग में मुफ्ती मोहम्मद अनवर कासमी की सदारत में हुई। वहीं खानकाह मजहरिया मुनामिया फिरदौस नगर डोरंडा में अल्लामा मौलाना सैयद शाह अलकमा शिबली कादरी की सदारत में हुई। सभी ने चांद होने की खबर की पुष्टि की और  ईद के चांद की घोषणा कर दी।

देर रात तक होती रही खरीदारी

ईद का चांद का ऐलान होते ही बाजारों में उमड़ी भीड़। हर कोई खरीदारी करते नजर आए। सेवई, लच्छा की दुकानों में भीड़ रही। कपड़ा की दुकान, राशन दुकान, पानी पूरी ठेला, मेवाड़, आदि सभी जगहों पर भीड़ रही। देर रात तक होती रही खरीदारी। 
महिलाओं ने पकवान बनाने में जुटे रहे
चांद का ऐलान होते ही मुस्लिम घरों में महिलाओं ने पकवान बनाने में जुट गई। छोला चाट, पानी पूरी, दही बाड़ा, बिरयानी, पुलाओ, हलवा, लच्छा, सेवई, गुलाब जामुन आदि पकवान बनाने में जुटी रही। 

कर्बला चौक में लगा झूला

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कर्बला चौक के पास झूला लगा। झूला के आसपास कई खाने पीने के स्टॉल लगाये गये। 

सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम

रांची जिला पुलिस प्रशासन के द्वारा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम था। हर जगह पुलिस के जवान तैनात थे। 

  • ईद का त्यौहार पूरी ईमानी बेदारी के साथ मनाया जाये मुफ्ती अनवर कासमी

इमारत शरिया के काजी मुफ्ती मुहम्मद अनवर कासमी ने कहा की ईद उल फितर एक बड़ा इस्लामी त्यौहार है। ईद की खुशी में अपने आस-पड़ोस और मोहल्ले के ऐसे लोगों को ईद की खुशी में शामिल करें जो कमजोर हो, उनकी मदद करें और उनकी मदद इस अंदाज में किया जाए कि उनकी इज्जत को ठेस ना लगे। ईद का त्यौहार पूरी ईमानी बेदारी के साथ मनाया जाए। ईतमिनान व सकून के साथ नमाज के लिए आए और जाएं। इस्लाम के पैगाम को आम किया जाये और यह कोशिश की जाए कि आप से किसी को तकलीफ न पहुंचे। ईद में अल्लाह पाक रोजा और तरावी के बदले इनाम से नवाजता है। इसलिए अल्लाह पाक से खूब दुआ करें, ईद की नमाज के बाद दुआ कुबूल होती है। ईद साल का एक बड़ा त्यौहार है। अल्लाह और उसके रसूल ने त्यौहार मनाने का जो तरीका बताया है, उसी तरीके में ईद मनाना है। और उसी से खुशी हासिल करना है। और जो इसमें अपनी मनमानी चलाएं और नई बातों को जोड़ें उसको ईद की रूहानी खुशी हासिल नहीं हो सकती।

  • ईद-उल-फितर हमें न्याय, शांति, भाईचारे का संदेश देती है : मुफ्ती रहमतुल्लाह 

रांची मदरसा जमीयतुल मोहसिनात के प्रिंसिपल मुफ्ती रहमतुल्लाह मजाहिरी ने ईद के संदेश पर कहा कि ईद उल फितर हमारे लिए न्याय व निष्पक्षता, शांति व व्यवस्था, भाईचारा, करुणा, प्रेम और सहनशीलता का एक सुंदर संदेश देता है। ताकि हम अकेले नहीं बल्कि सामूहिक रूप से जश्न खुशी मना सकें। गरीबों को सहारा देकर, टूटे हुए दिलों को जोड़कर, रूठे हुए अपनों को मना कर, बिना भेदभाव के रूहानी और जिस्मानी गंदगी को दूर कर जाति कौम आपसी रंजिश और मतभेद भुलाकर इस्लामी जमीयत का सबूत देती है। ईद उल-फित्र ब्रह्मांड के निमार्ता से इनाम का दिन है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी बनती है की हम अपने आप को जांचे। पवित्र महीने में शरीयत और सुन्नत के पालन और नेक कामों से अल्लाह की इबादत कर कितने हक अदा किये हैं? जिसके द्वारा हम अल्लाह से इनाम और श्रम मजदूरी प्राप्त करने के योग्य हैं या नहीं? यह मानव का स्वभाव है कि वह सुख के अवसर की लालसा करता है। इस इच्छा को पूरा करने के लिए, इस्लाम ने हमें दो त्योहार दिए हैं पहला ईद उल-फितर है और दूसरा ईद अल-अजहा है।

  • सदका फितरा अदा करने के लिए मालदार होना जरूरी नहीं : मौलाना कुतुबुद्दीन

एदारा ए शरिया झारखंड के नाजिम आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने ईद के पैगाम में कहा कि रमजान महीने के आखिर में सदका फितरा अदा करना है। इसके पीछे हिक्मत (सोच) यह है कि इसकी अदायगी करने से एक तो गरीबों को खाने को कुछ मिलता है और दूसरा रोजेदार द्वारा रोजे के दौरान की गयी गलतियों और फुजूल कामों का कफ्फारा अदा हो जाता है। सही बुखारी और सही मुस्लिम के अनुसार, एक हदीस है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सदका फितरा को अनिवार्य (करार) दिया। सदका फितरा रमजान के महीने के अंत में ईद की नमाज से पहले हर मुसलमान, गुलाम, आजाद, मर्द, औरत, बच्चे, बूढ़े, एक सा (लगभग ढाई किलो) रोजाना खाने वाली चीजों में से अदा करना यानी निकालना है। अगर ईद की नमाज के बाद सदका फित्रा दिया जाए तो वह आम सदका में से एक होगा। फितरा अदा नहीं होगा। ईद की नमाज से पहले सदका फितरा निकालना सही है। सदका फितरा केवल अनाज के रूप में अदा करना बेहतर है। लेकिन यदि इस अनाज का मूल्य यानी नकद भी बतौर फितरा में दिया जाता है, तो यह सही है। सदका फितरा केवल गरीबों और बेसहारा (मिस्किन) लोगों को दिया जाएगा। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सदका फितरा अदा करने के लिए साहबे नसाब यानी मालदार होना जरूरी नहीं है।

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