- मनुष्य को अन्य प्राणियों से सर्वश्रेष्ठ माना गया है... विषय पर चर्चा हुई
एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रज्ञा मंडल, महिला मंडल प्रतिनिधित्व में वरिष्ठ साधक परिवार ने अपने सुपौत्र शिवेश का जन्मदिवसोत्सव संस्कार अपने आवासीय गृह तपोवन में अपने ईष्टदेव को नमन-वंदन, अखंड दीप प्रज्ज्वलित व पंच देवतत्व का गायत्री युग यज्ञ पद्धति वैदिक विधान से पूजन-अर्चन कर हर्षोल्लास मनाया।
इस दौरान वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ परम पूज्य गुरुवर श्रीआचार्य और शांतिकुञ्ज का संदेश भी सुनाकर संस्कार परंपरा पर बताया गया कि मनुष्य को अन्य प्राणियों से सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जन्मदिन वह पावन पर्व है, जिस दिन स्रष्टा ने हमें श्रेष्ठतम जीवन में पदोन्नत किया, श्रेष्ठ जीवन प्रदान करने के साथ स्रष्टा प्राणी से उसी अनुरूप में श्रेष्ठ आचरण की भी अपेक्षा रखता है।
हमें अपने अंदर क्रमश: श्रेष्ठतर मानवोचित संस्कारों का विकास करने के संकल्प लेने चाहिए। युग ऋषि ने जन्मदिन को विवेक सम्मत संस्कार का रूप दिया है।जेएनपी ने बताया कि प्रचलित अनेक पर्व-त्यौहार मनाये जाते हैं, पर व्यक्तिगत दृष्टि से मनुष्य का अपना जन्मदिन ही उसके लिए सबसे बड़े हर्ष, गौरव एवं सौभाग्य का दिन हो सकता है।
मौके पर गुरु ईश सहित पंचतत्त्व देव का पंचोपचार पूजन किया गया और शिक्षण एवं प्रेरणा में शिशु के माध्यम से उपस्थित आगंतुक अतिथि देवगणों को स्मरण कराया गया कि मानव शरीर पंचतत्त्व से बना है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश इन पांच तत्त्वों की विशेषता पर प्रकाश डाला गया। देवपूजन सहित दीपक व अगरबत्ती क्रमश: थाली में प्रज्ज्वलित कर पंचतत्व देवों का नमन वंदन और पंचोपचार पूजन-अर्चन कर एक भाव वंदना की गयी।
मौके पर गायत्री परिवार साधक-शिष्य आनलाइन फेमिली सेलिब्रेशन समूह और उपस्थित परिवार जन व आगन्तुक परिजनों ने मंगलकामना व आशीर्वचन में बालक का नाम लेकर अक्षत-पुष्प की वर्षा व आशीर्वचन मंत्र पाठ कर उसकी दीघार्युष्य, स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्ज्वल भविष्य भव का संदेश व जयघोष किये। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।