- भगवान आपके पुत्र का दर्शन करने आयें ध्रुव और प्रह्लाद की तरह
टीम एबीएन, रांची। श्री जगतगुरू देवाचार्य मलुक पीठाधीश्वर श्री राजेन्द्र दास जी महाराज के कृपापात्र शिष्य परम पूज्य आचार्य दीनानाथ शरण जी महाराज श्री धाम वृंदावन के मुखारविंद से आज चतुर्थ दिवस की भागवत कथा में कहा कि ध्रुव जैसा देदीप्यमान पुत्र चाहिए तो सुनीति जैसी मां चाहिए। सुनीति मतलब सुंदर नीति, विचार, संस्कार से परिपूर्ण माता; क्योंकि माता ही समाज की पहली पालक, रक्षक, मार्गदर्शक और गुरू है।
यह है माता की महिमा। यही मां समाज गढ़ती है। मां का चरित्र, संस्कार की शुद्धता, शिक्षा ही मानव सभ्यता का आधार है। माता पिता ही सच्चा हितैषी है। राक्षस कुल में भी मां कयाथु ने बेटा प्रह्लाद को संस्कार दिया। बच्चे को धन दे पायें या न दे पायें पर संस्कार दीजिये। संस्कार न दीजियेगा, तो संस्कृति बदल लेगा।
सुनीति की तरह संस्कार दीजिये, ताकि भगवान आपके पुत्र का दर्शन करने आयें ध्रुव और प्रह्लाद की तरह। आज की कथा में श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव भी मनाया गया। इसकी मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गयी। कल कृष्ण रुक्मिणी विवाह का प्रसंग और झांकी होगी। यह जानकारी पंडित रामदेव पाण्डेय ने दी।