राख बुध
हे मनुष्य तु मिट्टी है और मिट्टी में मिल जायेगा
राख बुध ख्रीस्तीय विश्वास के आधार पर चालीसा काल का शुरूआती दिन है। मसीही विश्वासीगण माथे पर पवित्र राख राख मलन कर प्रतीकात्मक स्वरूप तपस्यकाल में प्रवेश करते हैं।चालीस दिनों का यह तपस्याकाल येसु मसीह के चालीस दिन और चालीस रात की कठिनतम तपस्या का भी स्मरण कराता है।
कैथोलिक कलीसिया इस चालीसा में विनती -प्रार्थना, उपवास, पश्चाताप, एवं त्याग- तपस्या व परहेज आदि का आह्वान और मार्गदर्शन करती है।राखबुध से लेकर पास्का पर्व तक हर शुक्रवार एवम गुडफ्राइडे के दिन येसु ख्रीस्त के दु:खभोग की स्मृति में हर ख्रीस्तीय विश्वासी क्रूस रास्ता में भाग लेते हैं।
राख बुध वह पवित्र दिन है जब ख्रीस्तीय विश्वास के रहस्य में प्रवेश करते हैं और ख्रीस्त के पुनरुत्थान में सहभागी बनते हैं। राख बुध का निर्धारण दिवस भी महत्वपूर्ण है। चाँद की गति के आधार पर गणना की जाय तो 21 मार्च को दिन और रात बराबर होते हैं और 21 मार्च के बाद जो पूर्णिमा आता है ठीक उसके बाद का रविवार पास्का रविवार का दिन होता है।
उसके 40 दिन पहले (रविवार को छोड़ कर) राख बुध का दिन निर्धारण होता है। रविवार को जोड़ने से 46 दिन होता है और यह पुण्य काल अपने जीवन में हो रहे गलतियों गुनाहों पर विचार कर उन्हें त्यागने का समय पवित्र समय है। (लेखक झारखंड क्रिस्चियन यूथ एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष हैं।)