टीम एबीएन, रांची। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के महातपस्वी आचार्य श्रीमहाश्रमण जी की विदुषी समणी डॉ निर्वाणप्रज्ञा जी तथा श्रमणी मध्यस्थप्रज्ञा जी का रांची में प्रवास चल रहा है। समणी जी ने आज नव वर्ष के प्रथम दिवस के अवसर पर वृहद मंगल पाठ का वांचन किया। तत्पश्चात आगे के कार्यक्रम में महिला मंडल एवं बच्चों ने गीतिका पेश की। तत्पश्चात प्रवचन हुआ।
समणी जी ने आज प्रवचन में बताया कि इस नव वर्ष में हमलोगों को अपने बच्चों को अपनी भारत की संस्कृति, अपने हिंदी महीने चैत्र, बैशाख आदि की जानकारी भी देनी चाहिए, साथ ही हमारे पूर्वजों के द्वारा जो संस्कृति हमे धरोहर में मिली है वो आगे हमारी आने वाली पीढ़ी को भी प्राप्त हो।
इस जंबूद्वीप, आर्यावर्त में हमारे पूरे भारत की भूमि बहुत ही पावन है, इस भूमि में राम-कृष्ण भगवान, तीर्थंकर भगवान, बड़े-बड़े महापुरुषों, आचार्यों, साधु संतों आदि का जन्म हुआ है यहां पर उन्होंने हमारे तरह ही मनुष्य आयु में अपने कर्म किये है साथ ही हमलोगो को अत्यंत ज्ञान दिया है, जो कि आज के हमारे जीवन मे बहुत ही उपयोगी है, हमने भी इसी पावन धरती में जन्म लिया है इस धरती पर गर्व होना चाहिए।
साथ ही बताया कि भारत के लोगों में जितनी सहिष्णुता है, उतनी सहिष्णुता विश्व में कहीं नहीं है। विदेश में लोग अपने-अपने देश की भाषा का प्रयोग करते हैं और विदेशी लोग भारत भ्रमण करने आते हैं, तो भी अपनी ही देश की भाषा बोलते हैं, ओर हम भारतवासी आज भारत मे दूसरे देशों का भाषा बोलते है, हमे अपनी देश की भाषा का प्रयोग करना चाहिए, उसे बढ़ावा देना चाहिए।
आजकल विदेशों में लोग हमारी भारत्तीय संस्कृति को अपना रहें है और हमारे लोग उनका खान पान, पहनावा को अपना रहे हैं, जबकि भारत जैसा मौसम, खानपान, यहां के जैसा रहन सहन पहनावा पूरे विश्व मे कहीं नही है, हमें अपने भारत देश पर गर्व होना चाहिए।
आज के कार्यक्रम में समाज के अमरचंद बैंगानी, विनोद बेगवानी, सुभाष चंद बोथरा, घेवरचंद नाहटा, विमल दस्सानी, अशोक सुराणा, नीरज सिंघी, विशाल सिंघी आदि उपस्थित थे। उक्त जानकारी समाज के मीडिया प्रभारी सुरेश जैन (8340247771) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।