- प्रज्ञायोग व्यायाम गायत्री महामंत्र के अक्षर, शब्द और व्याहृति सहित करने का अभ्यास क्रम बताया गया
टीम एबीएन, रांची। गायत्री परिवार राष्ट्र स्तरीय आनलाइन स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व व संवाद की श्रृंखला में स्वास्थ्य संवर्धन युग साहित्य कैटगरी में एक सप्ताह तक स्वाध्याय पाठ व संवाद के उपरांत इसके स्वाध्याय व अभ्यास से लाभान्वित होने का अनुभव साझा किया गया और भागीदार व लाभान्वित साधक-शिष्य भाई-बहनों ने इसपर अपना विचार प्रस्ताव रख कर सत्र संचालिका सह प्रशिक्षका पूजा पटेल दीदी से अनुरोध कर इसका अभ्यास क्रम बढ़ाने तथा और अधिक लाभान्वित होने के लिए इस प्रज्ञायोग व्यायाम प्राणायाम आसन मुद्रा को कुछ दिन अधिक चलाने का अनुरोध किया।
उनमें आधा दर्जन शामिल भाई-बहनों ने इस स्वाध्याय पाठ-संवाद व अभ्यास क्रम से अपनी स्वास्थ्य लाभ में वृद्धि महसूस कर पुष्ट करते हुए बताया कि अपने कन्धों, बांहों, कमर,कूल्हे पीठ, पीछे गर्दन की दर्द निवारण में बहुत राहत की अनुभूति की गयी।
अत: इस योगासन व्यायाम प्राणायाम को हर्षोल्लासपूर्वक एक स्वर से कुछ और समय तक बढ़ाया गया। साथ ही साथ गुरुवर श्रीपूज्यवर की लिखी व बतायी गयी प्रज्ञायोग व्यायाम की श्रृंखला गायत्री महामंत्र के अक्षर, शब्द और व्याहृति सहित भावभरा सस्वर उच्चारण साथ जोड़कर करने का अभ्यास क्रम बताया गया।
आगे दीदी ने बताया कि प्रज्ञायोग में गायत्री महामंत्र के सस्वर उच्चारण से शरीर के साथ मन की एकाग्रता और भावनात्मक पवित्रता भी साथ-साथ होता रहता है। प्रज्ञायोग की मुद्रायें चित्र सहित समझायी गयी। इसमें 16 मुद्रा निर्देश की श्रृंखला होती है।
इस पर विस्तार से प्रकाश डालकर सिखाया व कराया गया। अगला स्वाध्याय घरेलू चिकित्सा, ऊषा-पान, शाकाहार व उपासनात्मक प्राणायाम पर स्वाध्याय और मार्गदर्शन किया जायेगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।