40 करोड़ के घोटाला का है मामला
टीम एबीएन, रांची। मनी लाउंड्रिंग केस में इडी ने गुरुवार को योगेंद्र तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की है। ये शराब घोटाला करीब 40 करोड़ का है। इस मामले में ईडी योगेंद्र तिवारी से पहले भी पूछताछ कर चुकी है। 2021-22 में शराब के थोक व्यापार का उन्हें ठेका मिला था।
योगेंद्र तिवारी पिछले दिनों पूछताछ के दौरान इडी के सवालों से बचने की कोशिश करते रहे। शराब के व्यापार से जुड़े मामलों में उन्होंने सही-सही जानकारी नहीं दी थी। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया था कि वर्ष 2021-22 में उन्हें शराब के थोक व्यापार का ठेका मिला था।
19 जिलों के थोक व्यापारियों के लिए एक जिले के एक ही बैंक से डिमांड ड्राफ्ट बनाये जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने सिर्फ अपनी कंपनी के नाम से बने ड्राफ्ट की जानकारी दी थी। बाकी थोक व्यापारियों से अपना किसी तरह का व्यापारिक संबंध होने से इनकार कर दिया था।
पिछले दिनों इडी आफिस पहुंचे थे तिवारी
शराब के व्यापार में प्रेम प्रकाश की भूमिका के जुड़े सवालों को भी योगेंद्र तिवारी ने पिछले दिनों इडी की पूछताछ में टालने की कोशिश की थी। पिछले दिनों पूछताछ के दौरान योगेंद्र तिवारी ईडी आफिस दस्तावेज लेकर आये थे, लेकिन उनमें से अधिकतर दस्तावेज इडी की मांग के अनुरूप नहीं थे।
गौरतलब हो कि इडी ने शराब घोटाले मामले में पिछले दिनों योगेंद्र तिवारी सहित 32 लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान 30 लाख कैश और आभूषण सहित कई दस्तावेज बरामद किए गए थे। इसके बाद योगेंद्र तिवारी को पूछताछ के लिए 26 अगस्त को ईडी आफिस बुलाया गया था।
इडी की जासूसी का आरोप
सूत्रों के अनुसार योगेंद्र तिवारी इडी के अधिकारियों का जासूसी करवाता था। वह मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपने खिलाफ एजेंसी की हर गतिविधि की जानकारी रखना चाहता था। करीब एक महीने तक ईडी को इसकी भनक नही लगी। जब इस बात की जानकारी ईडी को मिली तो हैरान हो गयी। जामताड़ा के अलग-अलग थानों में इसके खिलाफ कुल 14 प्राथमिकी दर्ज है।
सूत्रों के मुताबिक इन्हीं प्राथमिकियों में से दो प्राथमिकी ऐसी हैं, जिनमें उत्पाद अधिनियम की धाराएं लगी हैं। योगेंद्र तिवारी अपने तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर हैं। योगेंद्र तिवारी ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाकर अकूत संपत्ति अर्जित की है।