एबीएन सोशल डेस्क। रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वावधान में महर्षि मेंही आश्रम चुटिया, रांची में चल रहे पक्ष ध्यान साधना शिविर में आज तेरहवें दिन के सत्संग में दूर-दूर से पधारे साधकों एवं भक्तों को ऋषिकेश आश्रम से आये हुए पूज्य स्वामी गंगाधर जी महाराज, आश्रम के वरिष्ठ स्वामी श्री निर्मलानंद जी महाराज व चतरा आश्रम के स्वामी डॉ रविंद्रनाथ ने संबोधित किया।
पूज्य स्वामी गंगाधर जी महाराज ने कहा कि ध्यान भारतीय मनोवियों की एक अनुपम देन है। शून्यगत मन को ध्यान कहते हैं। ध्यान के माध्यम से साधक अपने मन पर नियंत्रण करते हैं। मन की चंचलता के कारण मनुष्य को सुख और शांति नहीं मिलती है। ध्यान से मनोनिरोध किया जाता है। मन पर विजय प्राप्त होने से सभी इंद्रियों पर विजय पाया जाता है।
आगे उन्होंने कहा कि ध्यान योग के अतिरिक्त इस संसार में पाप का नाश करने कोई दूसरा तत्व नहीं है। महर्षि मेंही आश्रम के स्वामी पूज्य श्री निर्मलानंद जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि संसार के प्राय: सभी धर्मों में ध्यान की पद्धति है। वैदिक धर्मावलंबी इसे ध्यान, इस्लाम धर्मावलंबी इसे मराकवाह और इसाई धर्म वाले इसे मेडिटेशन कहते हैं।
मन को वश में करने के लिए इश्वरवाचक नाम का जप एवं नाम से संबंधित रूप का ध्यान किया जाता है। स्थूल से सूक्ष्म में प्रवेश करने के लिए बिंदु ध्यान और शब्द साधना की आवश्यकता है। संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने इसी को मानस जप, मानस ध्यान, दृष्टि योग और नादानुसंधान कहते हैं।
आगे उन्होंने कहा कि ध्यान में सफलता के लिए गुरुकृपा, सच्ची लगन व दृढ़ अभ्यास की आवश्यकता है। संतों ने मानवमात्र के लिए इसे उपयोगी कहा है। संतमत सत्संग से अंतर्साधना करने की प्रेरणा हो जाती है जिसे करने पर ही मानव अपना परम कल्याण कर सकते हैं।
ज्ञात हो कि शिविर में प्रतिदिन स्तुति प्रार्थना, भजन गायन, सत्संग योग एवं रामचरितमानस का पाठ एवं प्रवचन के कार्यक्रम होते हैं। साधकों एवं साधू संतों के लिए प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था होती है। शहर एवं अन्य जगहों के श्रद्धालु गण इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु समिति के पदाधिकारी गण पूरी तत्परता से कार्य कर रहे हैं।