टीम एबीएन, रांची। रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वाधान में चल रहे पक्ष ध्यान साधना शिविर के पांचवें दिन ऋषिकेश आश्रम से आये पूज्य स्वामी गंगाधर जी महाराज ने सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित साधकों को प्रवचन के क्रम में कहा कि यह संसार नाम रूपात्मक है।
साधक नाम जपकर अंत: करण को शुद्ध करता है। नाम के प्रभाव से पापी हृदय भी पवित्र हो जाता है। संकट से घिर जाने पर भक्त यदि अतिभाव से नाम लेता है तो उसका संकट टल जाता है। भगवान राम, भगवान कृष्णा के द्वारा जितना कल्याण हुआ उनके नाम से उससे भी ज्यादा आज भक्तों का कल्याण हो रहा है। नाम के प्रभाव से भक्त अजामिल, गानिका, प्रह्लाद, मीरा आदि संत बन गये।
महर्षि मेंही आश्रम, चुटिया के वरिष्ठ स्वामी पूज्य निर्मलानंद जी महाराज ने कहा कि भक्त चार प्रकार के होते हैं :- आर्त, भथार्थ, जिज्ञास और ज्ञानी। इन चारों का आधार नाम ही है। नाम के प्रभाव से भक्त नामी के पास पहुंच जाता है। नाम दो तरह के होते हैं :- वर्णात्मक और ध्वन्यात्मक।
वर्णात्मक नाम का जप होता है और ध्वन्यात्मक नाम का ध्यान होता है। साधक वर्णात्मक के सहारे ही ध्वन्यात्मक नाम को प्राप्त करता है। संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज का उद्घोष है :-
राम नाम अमर नाम : भजों भाई सोई!
सोई सतघुन सव : घट-घट होई!!
अत: हम सभी को गुरु निर्देशित साधना पथ पर चलकर आत्म कल्याण करने के लिए सतत-प्रयत्नशील रहना चाहिए। ज्ञातव्य है कि यह साधना शिविर 30/09/2023 से ही चल रहा है, जिसमें 5 घंटे का ध्यानाभ्यास एवं तीन समय में सत्संग होता है।
अत: सभी धर्म प्रेमियों से निवेदन करता है कि अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में भाग लेकर पुण्य के भागी बनें। उक्त जानकारी रांची जिला संतमत सत्संग समिति, रांची के सक्रिय सदस्यों ने दी।